बर्थडे पर दिया था भाभा एटॉमिक सेंटर का इंटरव्यू, 5 दिन बाद दिल्ली हादसे में गई युवा वैज्ञानिक की जान
सूचना मिलते ही भरतपुर से परिवार दिल्ली के लिए रवाना हो गया। परिजनों का आरोप है कि मलबे से निकालने के बाद कपिल को पहले एक नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब एक घंटे तक उन्हें सही इलाज नहीं मिला।

,,दिल्ली के सैदुलाजब इलाके में हुई इमारत ढहने की दर्दनाक घटना में मारे गए कुल छह लोगों में राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले 25 वर्षीय कपिल लवानिया भी शामिल हैं, जिन्होंने मात्र पांच दिन पहले ही अपना जन्मदिन मनाया था और उसी दिन वह अपना सपना पूरा करने की बिल्कुल दहलीज पर पहुंच गए थे। परिजनों ने बताया कि इस हादसे से मात्र 6 दिन पहले यानी 25 मई को कपिल भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में 'साइंटिफिक ऑफिसर' की पोस्ट के लिए इंटरव्यू देने गए थे और परिवार के अनुसार इंटरव्यू पैनल ने कपिल को बताया था कि उन्हें जल्द ही ऑफर लेटर मिल जाएगा। हालांकि इस हादसे ने देश सेवा का सपना देख रहे एक युवा को ना केवल हमेशा के लिए शांत कर दिया, बल्कि देश ने एक उभरता हुआ वैज्ञानिक भी खो दिया, जिससे उनके परिवार और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार 25 मई को जब कपिल अपना 25वां जन्मदिन मना रहे थे, इसी दिन मुंबई में BARC के वैज्ञानिक 'साइंटिफिक ऑफिसर' पद के लिए उनका इंटरव्यू ले रहे थे। करीब घंटेभर चले इस साक्षात्कार में चयनकर्ताओं का पैनल ना केवल उनके प्रदर्शन से प्रभावित हो गया था, बल्कि उन्होंने जल्द ही कपिल को चयन पत्र (ऑफर लेटर) भेजने का भरोसा दिया था। बर्थडे पर मिली इस खुशी से कपिल बेहद उत्साहित थे और दिल्ली लौटने के बाद अपने दोस्तों के साथ इस खुशी का जश्न मनाने की तैयारी में जुट गए थे।
एक हादसे ने छीन लिया परिवार का चिराग
इंटरव्यू के ठीक पांच दिन बाद, 30 मई की शाम को कपिल सैदुलाजब में बने एक कैंटीन में अपने दोस्तों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान कैंटीन के बगल वाली एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसके मलबे में वह कैंटीन भी आ गई, जिसमें कपिल अपने दोस्तों के साथ बैठे हुए थे। इसी दौरान पांच अन्य लोगों के साथ कपिल की भी जान चली गई। कपिल ने राजस्थान के भरतपुर से बीटेक की डिग्री ली थी और वह एक साइंटिस्ट बनकर देश की सेवा करना चाहते थे।
आधे घंटे में जश्न की खुशी, हादसे के गम में बदली
हादसे से चंद मिनट पहले शाम करीब 7.23 बजे कपिल ने अपनी छोटी बहन रितिका से फोन पर बात की थी और बताया था कि वह दोस्तों के साथ जश्न मनाने बाहर जा रहे हैं। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रात 7.55 बजे कपिल ने दोबारा फोन किया और बेहद गंभीर आवाज में कहा कि वह घायल हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है। उन्होंने अपने पिता राजेश लवानिया से भी बात कर कहा था, ‘पापा, मेरी हालत खराब है, आप लोग आ जाओ।’
शुरू से पढ़ाई में अव्वल रहा था कपिल
कपिल के चाचा और राजस्थान में एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य मुकेश लवानिया ने बताया कि उन्होंने ही कपिल को विज्ञान के विषय में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। कपिल के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 'बारहवीं क्लास में कपिल ने 85 प्रतिशत नंबर हासिल किए थे, फिर वह JEE की तैयारी के लिए कोटा चला गया था, और इस परीक्षा में उसने 97.6 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। आगे उसने जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था।'
तीन महीने की तैयारी में क्रैक की थी GATE
चाचा ने आगे बताया कि इसके बाद कपिल GATE की तैयारी के लिए दिल्ली आ गया था और तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद ऑल इंडिया रैंक 57 के साथ GATE क्वालिफाई की थी।' उन्होंने बताया कि 'गेट (GATE) में बेहतरीन रैंक के आधार पर ही कपिल BARC की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू तक पहुंचा था।' इसके बाद उन्होंने रोते हुए कहा, 'देश ने एक साइंटिस्ट खो दिया।'
उधर भरतपुर में खाद का व्यवसाय करने वाले कपिल के पिता राजेश लवानिया ने टूटती आवाज में कहा, 'मैंने सब कुछ खो दिया। मेरा बेटा पूरे परिवार की उम्मीद था। हमारे खानदान से आज तक कोई भी साइंटिस्ट नहीं बना था और वह बिल्कुल करीब पहुंच गया था। लेकिन अपना सपना पूरा करने से पहले ही वह हमें छोड़कर चला गया।'
परिवार का इलाज में लापरवाही का आरोप
परिवार को कपिल के फोन से ही उसके घायल होने की सूचना मिली, जिसके बाद सूचना मिलते ही परिवार भरतपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो गया। परिजनों का आरोप है कि मलबे से निकालने के बाद कपिल को पहले एक नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब एक घंटे तक उन्हें सही इलाज नहीं मिला। बाद में उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


