अवध ओझा क्यों अब भगवान से कहने लगे- मुझे कभी सत्ता में मत लाना
अवध ओझा ने हिंदू-मुस्लिम सोच या धार्मिक आधार पर टकराव को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि वह सत्ता में आ गए तो बदतमीजी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

विधायक बनने की पहली कोशिश में नाकाम रहे आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता अवध ओझा अब भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि वो कभी सत्ता में ना आएं। मशहूर शिक्षक ने एक वीडियो में खुद यह बात कहते हुए एक दिलचस्प वजह भी बताई। ओझा ने कहा कि उन्हें बदतमीजी बर्दाश्त नहीं है और यदि वह सत्ता में आ गए तो 30-40 करोड़ लोगों को ऐसे ही निपटा देंगे, इसलिए भगवान से अब ऐसी प्रार्थना कर रहे हैं।
अवध ओझा आम आदमी पार्टी के टिकट पर पटपड़गंज सीट से 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। पहले ही चुनाव में भाजपा प्रत्याशी से मिली हार से उनका दिल टूट गया था। ओझा जल्द ही राजनीति से दूरी बनाने लगे और कुछ महीनों बाद ही उन्होंने 'आप' से रिश्ता तोड़ते हुए संन्यास का भी ऐलान कर दिया। हालांकि, वह कई बार इशारों में तो कई बार खुलकर राज्यसभा जाने की इच्छा भी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में सत्ता में ना आने की प्रार्थना का उनका बयान काफी दिलचस्प है।
'आप' के पूर्व नेता ने बात तो शुरू की थी स्वरा भास्कर के विवादित बयान से। जौहर पर दिए गए बयान को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री को उन्होंने इतिहास पढ़ने की सलाह दी और उल्टे-सीधे कॉमेंट से बचने को कहा। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए उन्होंने हिंदू-मुस्लिम वाली सोच को लेकर कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को यह देखकर दुख होता होगा। इसके बाद उन्होंने कहा, ‘मैं प्रार्थना यही करता हूं कि भगवान मुझे सत्ता में मत लाना। डेली प्रार्थना करता हूं डेली।’
ओझा आगे कहते हैं, ‘आज के भारत की जो स्थिति है उसे देखकर मैं परमात्मा से डेली सुबह शाम कहता हूं कि प्रभु हमको ना लाना सत्ता में और ना हमको सत्ता में बिठाना। नहीं 30-40 करोड़ लोगों को तो मैं ऐसे ही निपटा दूंगा। बदतमीजी कतई बर्दाश्त नहीं होगी देश में। अब आगे भगवान की लीला, भगवान की मर्जी। अगर गलती से उसने देश की गद्दी पर बिठा दिया 30-40 करोड़ तो...।’
अच्छा हिंदू और अच्छा मुस्लिम बनने की सीख
अवध ओझा ने कहा कि एक हिंदू को अच्छा हिंदू और एक मुसलमान को अच्छा मुसलमान बनना चाहिए, ऐसा बनना चाहिए कि लोग तारीफ करें। उन्होंने कहा, ‘भाई तुम हिंदू हो तो कुछ ऐसा करो कि हिंदू होने पर गर्व महसूस हो। तुम मुसलमान हो तो ऐसा कुछ करो कि दुनिया तारीफ करे कि मुसलमान ऐसा होना चाहिए। कैसे हिंदू थे स्वामी रामकृष्ण परमहंस, रामानंद जी, कैसे मुस्लिम थे रहीम... देश को मिटा दोगे तभी मानोगे।’


