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अवध ओझा ने AAP और राजनीति छोड़ने पर बिहार चुनाव वाली क्या वजह बताई

अवध ओझा ने AAP और राजनीति छोड़ने पर बिहार चुनाव वाली क्या वजह बताई

संक्षेप:

एक साल में ही आम आदमी पार्टी और राजनीति को अलविदा कह देने वाले मशहूर कोचिंग टीचर अवध ओझा ने कहा है कि इसकी वजह उनकी अपनी ही कमजोरी है। अवध ओझा ने कहा है कि प्रैक्टिकल और थ्योरी में काफी अंतर होता है।

Dec 09, 2025 12:38 pm ISTSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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एक साल में ही आम आदमी पार्टी और राजनीति को अलविदा कह देने वाले मशहूर कोचिंग टीचर अवध ओझा ने कहा है कि इसकी वजह उनकी अपनी ही कमजोरी है। अवध ओझा ने कहा है कि प्रैक्टिकल और थ्योरी में काफी अंतर होता है। उनका थ्योरी का पक्ष मजबूत है, लेकिन प्रैक्टिकल में कमजोरी की वजह से उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ दी। ओझा ने कहा कि उन्हें लगा कि अभी और होमवर्क करने की जरूरत है।

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अवध ओझा पिछले साल 2 दिसंबर को आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। वह दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की छोड़ी पटपड़गंज सीट से चुनाव लड़े पर भाजपा प्रत्याशी रवि नेगी से मुकाबला हार गए। चुनाव के बाद से ही वह पार्टी की गतिविधियों से दूर होते चले गए और पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के साथ ही राजनीति भी छोड़ने की घोषणा कर दी।

प्रैक्टिकल की कमी रह गई: अवध ओझा

एक यूट्यूब पॉडकास्ट में अवध ओझा से जब आम आदमी पार्टी छोड़ने की वजहें पूछी गई तो उन्होंने खुद को प्रैक्टिल में कमजोर बताया। ओझा ने कहा, 'एक होता है प्रैक्टिकल और एक होता है थ्योरी। हम किसी भी फिल्ड में जाएं, जब जर्नलिज्म का लड़का है वह कोर्स करता है और फिर फील्ड में जाता है तो लगता है कि प्रैक्टिल और थ्योरी अलग है। मुझे राजनीति का प्रैक्टिकल पहलू बिलकुल नहीं पता था। मार्क्स को पढ़ना और लेनिन को पढ़ना और फिर उतरकर उन चीजों को फेस करना।' ओझा ने कहा कि उनका थ्योरीटिकल पार्ट बहुत मजबूत था, राजनीति के सारे कॉन्सेप्ट क्लियर थे। लेकिन अप्लाईड पार्ट में थोड़ी कमी रह गई थी।

कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण दे बोले- इस समय नकारात्मक राजनीति

पूर्व आप नेता ने कहा कि मौजूदा समय में राजनीति का प्रैक्टिकल पहलू बहुत नकारात्मक है। उन्होंने बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण देते हुए कहा, ‘1951 की बात करें तो बिहार के कर्पूरी ठाकुर शिक्षक हैं, नाई समाज से हैं, लेकिन उनका ना कोई समाज देख रहा है, सिर्फ यही देखता है कि वह बहुत अच्छे शिक्षक हैं, वह चुनाव जीतते हैं। बिहार के सीएम बनते हैं। यह 1951 का इंडिया है। लेकिन 2025 के इंडिया में अवध ओझा चुनाव हारते हैं।’

बिहार में केसी सिन्हा की हार से भी लगा झटका

अवध ओझा ने राजनीति छोड़ने की वजहों पर बात करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार चुनाव में केसी सिन्हा की हार से भी झटका लगा। उन्होंने कहा, 'मैंने ने सोचा कि चलो जनता ने मुझे स्वीकार नहीं किया कि अभी मास्टर साहब नए हैं, अभी रमो फिर सोचेंगे। फिर जब बिहार का चुनाव हुआ और डॉक्टर केसी सिन्हा चुनाव हार गए, वह मेरे लिए बहुत शॉकिंग बात थी। डॉ. केसी सिन्हा ने 70 किताबें लिखी हैं।'

ओझा ने कहा कि 1951 के चुनाव में हिन्दुस्तान की लोकसभा में एक से एक पढ़े लिखे लोग थे, जबकि 13 फीसदी साक्षरता दर थी। मुझे ऐसा लगा कि... अब अगर भागने की बात है तो कुमार विश्वास भी भाग गए, अमिताभ बच्चन भी भाग गए। मुझे ऐसा कि शायद मेरे होमवर्क में कमी है, मैं होमवर्क पूरा करूंगा, फिर मैं कुछ विचार इस पर कर सकता हूं। फिलहाल में डायरेक्ट राजनीति नहीं करूंगा।

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Sudhir Jha

लेखक के बारे में

Sudhir Jha
डिजिटल और प्रिंट मीडिया में डेढ़ दशक का अनुभव। भारतीय राजनीति के साथ एशियाई और वैश्विक मामलों की समझ। अर्थशास्त्र और खेल में भी रुचि। जम्मू-कश्मीर, लखनऊ और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले आज समाज, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, न्यूज ट्रैक, नवभारत टाइम्स में सेवा दे चुके हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन डिप्लोमा से पहले कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएशन किया है। जन्म बिहार में हुआ और पले-बढ़े मेरठ में। और पढ़ें
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