
अवध ओझा ने बताया AAP में किस बात की थी दिक्कत, छोड़ने के बाद क्यों खुश
राजनीति में अपनी छोटी सी पारी के बाद ही संन्यास की घोषणा कर देने वाले मशूहर शिक्षक अवध ओझा इन दिनों बेहद खुश हैं। हाल ही में राजनीति की राह छोड़ने वाले अवध ओझा ने कहा है कि वह इस बात को लेकर खुश हैं कि अब जो चाहें बोल सकते हैं, पार्टी लाइन के मुताबिक बोलने की बंदिश नहीं है। उ
राजनीति में अपनी छोटी सी पारी के बाद ही संन्यास की घोषणा कर देने वाले मशूहर शिक्षक अवध ओझा इन दिनों बेहद खुश हैं। हाल ही में राजनीति की राह छोड़ने वाले अवध ओझा ने कहा है कि वह इस बात को लेकर खुश हैं कि अब जो चाहें बोल सकते हैं, पार्टी लाइन के मुताबिक बोलने की बंदिश नहीं है। उनका इशारा उस इंटरव्यू की ओर था जब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीच में दखल देते हुए इसे बंद करा दिया था और बेबस होकर अवध ओझा ने कहा था कि पार्टी लाइन वही लोग बताएंगे और वह उसी मुताबिक बोल सकते हैं।
एक पॉडकास्ट में अवध ओझा ने कहा कि चुनाव लड़ने के बाद उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि यह उनके लिए उचित नहीं था। ओझा ने अब इस बात से भी इनकार किया कि वह आगे भाजपा में जा सकते हैं। इससे जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह टिकट नहीं मांगेंगे और राजनीति से दूर ही रहेंगे। इससे दूर रहकर ही वह खुश हैं।
अवध ओझा ने राजनीतिक दल में रहते हुए साफगोई से ना बोलने की विवशता का जिक्र करते हुए कहा, 'भैया मैं राजनीति ही नहीं करूंगा। दूर रहूंगा, बहुत खुश हूं। पहली बात तो बोलना बंद हो गया था। पार्टी लाइन के बाहर नहीं बोल सकते। ये नहीं बोल सकते... हम बोलेंगे नहीं तो मर जाएंगे। अब मैं इतना अच्छा महसूस कर रहा हूं। आज मुझे यह नहीं है कि कोई फोन करके कहेगा कि... अब तो वही बोलेंगे जो हमारा मन कहेगा।'
बीच में रोके गए इंटरव्यू का जिक्र करते हुए अवध ओझा ने याद किया कि किस तरह उन्हें बोलने से रोक दिया गया था। तब विवशता से बोले गए उस वाक्य को दोहराते हुए ओझा ने कहा, 'पार्टी लाइन तय करेगी... अच्छा बताओ वह इंटरव्यू कितना अच्छा चल रहा था... भगवान बचाए राजनीति से दादा।' यह पूछे जाने पर चुनाव में उन्हें कितना खर्च करना पड़ा, इसके जवाब में पूर्व नेता ने कहा कि पैसा तो एक रुपया खर्च नहीं हुआ। दोस्त, मित्र, हित ने दिए थे।
अवध ओझा दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। वह दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की छोड़ी सीट पटपड़गंज से चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के बाद से ही वह पार्टी के कामकाज से दूर दिख रहे थे। दोबारा अपने कोचिंग में व्यस्त हो चुके अवध ओझा ने पिछले दिनों राजनीति से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने की बहुत उत्कंठा की वजह से वह राजनीति में आए थे।





