रास्ता रोककर रेप की कोशिश, धर्म बदलने का दबाव डाला; विरोध करने पर चाकू घोंपा
गाजियाबाद में दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है। घर लौट रही एक लड़की से रेप की कोशिश की गई। उस पर धर्म बदलने का दबाव डाला गया। जब लड़की ने विरोध किया तो उस पर चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया गया। आरोपी लड़का कई दिनों से पीड़ित लड़की का पीछा कर रहा था।

गाजियाबाद नगर कोतवाली क्षेत्र में एक सनसनीखेज वारदात सामने आया है। एक युवती पर चाकू से हमला करने और धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का मामला सामने आया है। युवक कई दिनों से युवती का पीछा कर रहा था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह 12 जुलाई को पंचवटी से कोटगांव स्थित अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान समीर अलवी नामक युवक ने रास्ते में उन्हें रोक लिया। आरोप है कि समीर पिछले कई दिनों से लगातार उसका पीछा कर रहा था। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने रास्ता रोकने के बाद जबरन संबंध बनाने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उसने चाकू निकालकर हमला कर दिया।
अंजाम भुगतने की धमकी दी थी
पीड़िता का कहना है कि आरोपी लंबे समय से उस पर धर्म परिवर्तन करने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। बात न मानने पर आरोपी ने अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय का कहना है कि शिकायत पर 13 जुलाई को आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
झांसा देकर निकाह किया और रकम ऐंठी
गाजियाबाद के शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र में बीएसएफ जवान बताकर तलाकशुदा महिला से निकाह करने और दस लाख लेने का मामला सामने आया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।शालीमार गार्डन निवासी शबीना ने पुलिस को बताया कि उनका तलाक हो चुका है और वह अपने बीस साल के बेटे के साथ रहती हैं।
वेबसाइट पर हुई मुलाकात
महिला ने बताया कि एक वेबसाइट पर उनकी मुलाकात डिडवाना राजस्थान निवासी मकबूल खान से हुई थी। मकबूल ने खुद को तलाकशुदा और बीएसएफ का जवान बताया था। इसके बाद उन्होंने तीन जुलाई 2022 को उससे निकाह कर लिया। कुछ समय बाद शालीमार गार्डन में फ्लैट लेने के नाम पर मकबूल ने उनसे रुपये मांगे। उन्होंने अपना रुड़की स्थित एक प्लॉट बेचकर दस लाख रुपये दे दिए। मकबूल ने पांच लाख रुपये में फ्लैट बुक किया और किस्त बनवा ली।
आरोप है कि मकबूल ने उन्हें फ्लैट में सह-खरीदार बनाया और बचे हुए पांच लाख रुपये अपने पास रख लिए। इसके बाद से मकबूल खान ने घर आना कम कर दिया। जांच करने पर पता चला कि मकबूल बीएसएफ का जवान नहीं है और उसका अपनी पहली पत्नी से तलाक नहीं हुआ है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


