मोदी सरकार के हर फैसले में ट्रंप का दखल दिखता है, अमेरिकी टैरिफ पर अरविंद केजरीवाल

पीटीआई, नई दिल्ली
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। अमेरिकी सीनेट में रूसी तेल खरीदने को लेकर टैरिफ से जुड़ा बिल पास होने पर केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार के हर फैसले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दखल दिखता है।

Arvind Kejriwal
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार के हर फैसले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दखल दिखता है। केजरीवाल का यह बयान तब आया है जब अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पास किया है। इस बिल के तहत भारत समेत पांच देशों पर रूसी तेल खरीदने के लिए 100 प्रतिशत तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है। अमेरिका का मानना है कि इस तरह के व्यापार से यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिलता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिकी बिल से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए आप प्रमुख ने लिखा कि देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने, ट्रंप की गुलामी स्वीकार करने और भारत को अपमानित कराने के बाद मोदी देश के लिए यह स्थिति ले आए हैं। आज देश के हर छोटे-बड़े फैसले में ट्रंप का दखल है। उन्होंने हिंदी में किए गए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि मोदी ट्रंप की हर बात मान लेते हैं, चाहे वह सही हो या गलत। और ट्रंप हर क्षेत्र में भारत के खिलाफ फैसले लेते हैं।

बता दें कि अमेरिकी सीनेट ने एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। विधेयक में दावा किया गया है कि रूस के साथ तेल और पेट्रोलियम पदार्थों का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रहा है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से मंजूरी दी। यह विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देता है। चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देश हैं। रूस पर प्रतिबंधों के अलावा विधेयक में 1996 के ईरान प्रतिबंध अधिनियम की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है। इस बिल के पास होने के बाद भारत में सियासत गरमा गई है। विपक्ष केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है।

हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने इथेनॉल के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि E20 पॉलिसी का मकसद अमेरिका में बचे हुए इथेनॉल के लिए बाजार बनाना था। उनका कहना है कि सरकार ने बिना इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किए बिना जबरदस्ती E20 पॉलिसी लागू कर दी है।

Subodh Kumar Mishra

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Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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