‘शीशमहल’ पर कितना हुआ खर्च, CAG रिपोर्ट में खुलासा; कई गड़बड़ियों का दावा
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सीएम आवास (6 फ्लैग स्टाफ रोड) को लेकर सीएमजी की रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट कई वित्तीय गड़बड़िया की बात कही गई है।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सीएम आवास (6 फ्लैग स्टाफ रोड) को लेकर सीएमजी की रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट कई वित्तीय गड़बड़िया की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस परियोजना के लिए शुरुआत में केवल 7.91 करोड़ का अनुमान लगाया गया था, लेकिन असल खर्च बढ़कर 33.66 करोड़ तक पहुंच गया, जो 342 फीसदी ज्यादा है।
रिपोर्ट में लोक निर्माण विभाग (PWD) के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पीडब्लूडी ने निर्माण क्षेत्र में भी 36 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। निर्माण के दौरान निर्मित क्षेत्र को 1,397 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1,905 वर्ग मीटर कर दिया ।
जरूरत से ज्यादा महंगी और सजावटी चीजों पर खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक घर में घर में जरूरत से ज्यादा महंगी और सजावटी चीजें लगाई गईं। 18.88 करोड़ रुपये केवल घर को शानदार बनाने और महंगी चीजों पर खर्च किए गए, जो कि सामान्य मरम्मत के काम में जरूरी नहीं थे।
रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि स्टाफ ब्लॉक और कैंप ऑफिस के निर्माण के लिए मंजूर की गई 19.87 करोड़ में से रमक को अन्य कार्यों के लिए डाइवर्ट कर दिया गया । स्टाफ ब्लॉक का निर्माण ही नहीं किया गया और उस धन से किसी अन्य स्थान पर सात सर्वेंट क्वार्टर बना दिए गए, जिनका मूल कार्य से कोई संबंध नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक 17 मार्च 2020 को दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी के मंत्री ने '6 फ्लैग स्टाफ रोड' स्थित मौजूदा आवास के ग्राउंड फ्लोर में बदलाव और एक एक्स्ट्रा फ्लोर बनाने का प्रस्ताव रखा। इस काम को बेहद जरूरी बताया गया। इसके कुछ समय बाद, 27 जुलाई 2020 को पीडब्ल्यूडी के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर ने एक नया प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि पुरानी इमारत की दीवारें भार उठाने वाली हैं, इसलिए मौजूदा इमारत में बदलाव या नई मंजिल बनाना मुमकिन नहीं है। इसके बजाय उन्होंने पूरी पुरानी इमारत को गिराकर उसकी जगह नया निर्माण करने और इसके लिए आर्किटेक्ट/सलाहकार नियुक्त करने की सिफारिश की।
हैरानी की बात यह रही कि पीडब्ल्यूडी मंत्री और विभाग के सभी बड़े अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को उसी दिन तुरंत मंजूरी दे दी। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था जिससे यह पता चले कि पीडब्ल्यूडी ने पुरानी इमारत की मरम्मत या बदलाव की जरूरत को परखने के लिए कोई स्टडी की हो।
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Aditi Sharmaअदिति शर्मा
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