बरी होने के 4 घंटे बाद ही… CBI के खिलाफ हाई कोर्ट में केजरीवाल, क्या कहा
दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में सीबीआई की याचिका के खिलाफ केजरीवाल और सिसोदिया ने हाई कोर्ट में आवेदन दायर किया है। निचली अदालत ने केजरीवाल समेत अन्य नेताओं को मामले में बरी कर दिया था।

हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की याचिका के खिलाफ हाई कोर्ट में आवेदन दायर किया है। दरअसल, निचली अदालत ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य नेताओं को आबकारी घोटाला मामले में बरी कर दिया था। जिसके खिलाफ सीबीआई ने पुनरीक्षण याचिका डाली थी।
केजरीवाल और सिसोदिया ने सीबीआई के मामले की वैधता पर सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि निचली अदालत मामले में उनको बरी कर चुकी है और इस फैसले के चार घंटे के भीतर ही सीबीआई ने पुनरीक्षण याचिका डाल दी। यह एजेंसी की भूतपूर्व जल्दबाजी दिखाती है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सीबीआई की ओर से "बेहद गैर-गंभीर तरीके से दायर की गई।
याचिका में कहा गया
याचिका में कहा गया है कि निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह समझे बिना सीबीआई का यह कदम दर्शाता है कि वह किसी भी हाल में उन्हें मुकदमे में फंसाए रखना चाहते हैं। जबकि निचली अदालत में यह साबित हुआ है कि उनके खिलाफ सीबीआई के पास कोई सबूत नहीं है।
निचली अदालत ने अपने निर्णय में माना भी है कि सीबीआई ने ऐसा कोई तथ्य साक्ष्य पेश नहीं किया है जिससे आबकारी नीति मामले में घोटाले को प्रथमदृष्टया प्रमाणित करता हो। इसीलिए राउज एवेन्यू अदालत ने आप के प्रमुख नेताओं के साथ ही 23 लोगों को इस मामले में आरोपमुक्त करने का फैसला सुनाया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला आरोप तय के प्रथम स्तर पर ही खारिज हो गया। इस मामले में गवाहों के बयान दर्ज करने तक की नौबत नहीं आ पाई।
दोनों नेताओं ने उच्च न्यायालय से मांग की है कि सीबीआई की निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया जाए। इससे अदालत व उनका समय बर्बाद ही होगा। ज्ञात रहे कि इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को इस मामले से आरोपमुक्त कर दिया था। इस याचिका पर उच्च न्यायालय अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।
केजरीवाल समेत 23 आरोपी निचली अदालत से बरी
इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। सीबीआई की तरफ से डाली गई याचिका में कहा गया है कि निचली अदालत ने जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया और साक्ष्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
गौरतलब है कि आबकारी नीति दिल्ली सरकार द्वारा 2021 में तैयार की गई थी, जिसे बाद में कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बाद वापस ले लिया गया था। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सीबीआई को नीति की जांच का आदेश दिया था।


