दिल्ली में दोबारा चुनाव चाहते हैं केजरीवाल; भाजपा को दे डाली '10' की चुनौती, राजनीति छोड़ने की भी बात
शराब घोटाला मामले में कोर्ट से आरोप मुक्त किए जाने के बाद आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने पहली प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान केजरीवाल ने चुनौती देते हुए कहा कि मोदी जी आप दिल्ली में चुनाव करा लें, अगर बीजेपी को 10 से ज्यादा सीटें आईं तो वह राजनीति छोड़ देंगे।

शराब घोटाला मामले में कोर्ट से आरोप मुक्त किए जाने के बाद आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने पहली प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान केजरीवाल ने चुनौती देते हुए कहा कि मोदी जी आप दिल्ली में चुनाव करा लें, अगर बीजेपी को 10 से ज्यादा सीटें आईं तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। मैं जज साहब का धन्यवाद करता हूं। उन वकील भाईयों का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने हमारी लड़ाई लड़ी। चार वर्षों से हमारे ऊपर अत्याचार किया जा रहा था। चार वर्षों से ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल करके आप आदमी पार्टी पर शराब घोटाला का आरोप लगाया गया। अदालत को आज मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया फैसला लिया जाना था। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, ऐसा फर्जी केस है, एक भी गवाह नहीं, जिससे मुकदमा चलाया जा सके।
आप प्रमुख ने आरोप लगाया कि यह पूरा षड्यंत्र प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने मिलकर रचा। उन्हें देश से माफी मांगना चाहिए। आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए यह षड्यंत्र रचना। मैंने जिंदगी में केवल ईमानदारी कमाई है। भाजपा उस ईमानदारी पर चोट करना चाहती थी। अदालत के आदेश से साफ हो गया कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार है। आज मेरे दिल से बड़ा बोझ उतर गया। एक समय आम आदमी पार्टी के पांच बड़े नेताओं का जेल में डाल दिया गया, फिर भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए।
केजरीवाल ने कहा कि मेरा परिवार भुगतभोगी है। मनीष सिसोदिया की पत्नी को मल्टीपल स्कोलोरोसिस है। भाजपा की षड्यंत्र का खामियाजा दिल्ली की तीन करोड़ जनता भुगतान कर रही है। दिल्ली का बेड़ा गर्ग कर दिया। मोदी जी, दिल्ली में दोबारा चुनाव करा दो, तुम्हारी दस से सीटें आ जाएं तो राजनीति छोड़ दूंगा।
आप प्रमुख ने कहा कि अमेरिका आंखे दिखा रहा है, मोदी जी की हिम्मत नहीं है कि ट्रंप के खिलाफ एक शब्द बोल दें। आज ट्रंप भारत को गालियां दे रहा है, हमारे प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोल रहे हैं। देश संभालिए ना, हमनें आपको देश चलाने के लिए दिया था, प्रधानमंत्री केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से उलझ गए। सकारात्मक कार्य करके सत्ता हासिल कीजिए। केजरीवाल ने कहा कि अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि सीबीआई अपने अपने अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। ऐसा फैसला पहले कभी नहीं हुआ।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


