क्या वोटर लिस्ट के नियम सभी के लिए एक जैसे हैं? राघव चड्ढा मामले में AAP का EC से सवाल
पंजाब के वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा को शिफ्टेड दिखाने पर चड्ढा और आम आदमी पार्टी आमने-सामने आ गए हैं। चड्ढा ने इसको लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर आरोप लगाए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

वोटर लिस्ट मामले में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। चड्ढा द्वारा आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाने के बाद पार्टी के दिल्ली विधानसभा के चीफ व्हिप और बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने चुनाव आयोग से बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने के मामले पर सवाल उठाए। झा ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में दावा किया कि आम नागरिक, जिनमें गरीब और प्रवासी भी शामिल हैं, अपना नाम लिस्ट में जुड़वाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात कोई नहीं सुन रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को राघव चड्ढा की वोटर लिस्ट से जुड़े मामले पर देश के सामने अपना रुख साफ करना चाहिए।
देश को इसका जवाब मिलना चाहिएः झा
आप नेता ने पूछा कि क्या वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के नियम सभी के लिए एक जैसे हैं? या फिर बीजेपी में राजनीतिक रसूख रखने वालों के लिए कोई अलग व्यवस्था है? जब आम नागरिक, गरीब और प्रवासी वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो क्या उनकी बात नहीं सुनी जा रही है? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को न सिर्फ निष्पक्षता दिखानी चाहिए, बल्कि उसे साबित भी करना चाहिए। आप नेता ने कहा कि चुनाव आयोग को न सिर्फ निष्पक्षता दिखानी चाहिए, बल्कि उसे साबित भी करना चाहिए। अगर राघव चड्ढा के मामले में कोई खास प्रक्रिया अपनाई जा रही है तो देश को इसका जवाब मिलना चाहिए।
मेरा नाम गलत तरीके से शिफ्टेड दिखाया गयाः चड्ढा
इससे पहले, बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि पंजाब में वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में उनका नाम गलत तरीके से शिफ्टेड के तौर पर दिखाया गया है। उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया। चड्ढा ने कहा कि वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में रजिस्टर्ड है। लेकिन वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में उनका नाम शिफ्टेड के तौर पर दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि फाइनल वोटर लिस्ट अभी जारी नहीं हुई है। दावे और आपत्तियां की प्रक्रिया के दौरान नामों में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह पहले से ही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) गाइडलाइंस के तहत दिए गए उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह सिर्फ किसी क्लर्क की गलती नहीं लगती
एक्स पर एक पोस्ट में चड्ढा ने लिखा कि पंजाब में आप सरकार अब अपनी बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा का मौजूदा सांसद हूं और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। फिर भी वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरा नाम शिफ्टेड (दूसरी जगह चले जाने वाले) की कैटेगरी में डाल दिया गया है। अच्छी बात यह है कि ये सिर्फ वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट हैं, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान नामों को ठीक किया जाता है और यह प्रक्रिया अभी चल रही है। फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर 2026 में जारी की जाएगी। मैं पहले ही एसआईआर गाइडलाइंस के तहत दिए गए उपायों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हूं। यह सिर्फ किसी क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी अलग-अलग स्तरों पर शामिल थे।
नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके मामले में नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया। चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी भले ही पंजाब सरकार चलाती हो, लेकिन पंजाब की वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट उसकी निजी संपत्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, तब से उसकी लीडरशिप गुस्से से भरी हुई है। उसने पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार के प्रशासनिक तंत्र को हममें से उन लोगों के खिलाफ लगा दिया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया।
राजनीतिक बदले की भावना
पंजाब सरकार ने उन दूसरे सांसदों को भी निशाना बनाया है जिन्होंने आप छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी। गलत तरीके से कैटेगरी में डालना उसी राजनीतिक बदले की भावना का एक और कदम है। इससे भी जरूरी बात यह है कि चुनाव आयोग की एसाईआर के लिए डिटेल्ड गाइडलाइंस का पैराग्राफ 4(d) उन जन-प्रतिनिधियों के लिए एक 'प्रोटेक्टेड लिस्ट' बनाता है जिनकी पहचान की गई है। इसमें जज, सांसद और विधायक शामिल हैं। मैं पंजाब से मौजूदा सांसद हूं। अगर मेरा नाम लिस्ट में मार्क किया गया था तो पैराग्राफ 4(d) के तहत मुझे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए था। मेरे मामले में इसका जानबूझकर उल्लंघन किया गया।


