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गुरुग्राम में 750 एकड़ अरावली पहाड़ी वन में होगी तब्दील, पहले चरण में कितने गांव?

गुरुग्राम में 750 एकड़ अरावली पहाड़ी वन में होगी तब्दील, पहले चरण में कितने गांव?

संक्षेप:

हरियाणा वन विभाग ने गुरुग्राम जिले के 750 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र को सघन वन में तब्दील करने की योजना बनाई है। खास बात यह है कि योजना में सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

Jan 12, 2026 02:55 pm ISTKrishna Bihari Singh हिन्दुस्तान, गुरुग्राम
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अरावली पर्वत शृंखला की लुप्त होती हरियाली को पुनर्जीवित करने के लिए हरियाणा वन विभाग ने एक महात्वाकांक्षी योजना मातृवन का आगाज किया है। योजना के तहत गुरुग्राम जिले के 750 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र को सघन वन में तब्दील करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि इस पूरी योजना में सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि निजी कंपनियां अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के जरिए इस हरित क्रांति की जिम्मेदारी उठा रही हैं।

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पहले चरण में 3 गांवों में होगा पौधारोपण

वन विभाग ने अरावली के उन हिस्सों को चिन्हित किया है जहां खनन या अतिक्रमण के कारण हरियाली कम हो गई है। मातृवन योजना के पहले चरण में तीन गांवों की भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा। गुरुग्राम के पास स्थित इस गांव की पहाड़ियों पर बड़ा हिस्सा कवर होगा।

इन गांवों में विकसित होगी हरित पट्टी

हैदरपुर विरान और वजीराबाद में इन क्षेत्रों की 750 एकड़ भूमि को हरित पट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में सघन पौधरोपण से न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि शहर को बढ़ते वायु प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।

प्राइवेट एजेंसियों और कंपनियों ने दी सहमति

इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए छह प्रमुख निजी एजेंसियों और कंपनियों ने अपनी सहमति दे दी है। इन कंपनियों ने वन विभाग के साथ मिलकर पौधरोपण करने और अरावली के पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने का संकल्प लिया है।

निभाएंगी दीर्घकालिक भागीदारी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह भागीदारी एक दीर्घकालिक समझौते पर आधारित है। अक्सर देखा जाता है कि पौधरोपण के बाद रख-रखाव के अभाव में पौधे सूख जाते हैं, लेकिन मातृवन योजना में इसका विशेष समाधान निकाला गया है।

वजीराबाद क्षेत्र में फंड देगी यह कंपनी

इसमें डीएलएफ कॉर्पोरेट जगत की बड़ी हिस्सेदारी के साथ वजीराबाद क्षेत्र में तकनीकी मदद और फंड मुहैया कराएगी। इसके लिए कई संस्थाएं भी आगे आ रही हैं। क्रीडाई जो रियल एस्टेट सेक्टर की संस्था जो पर्यावरण संतुलन के लिए काम करेगी।

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एजेंसियां 5 साल तक करेंगी देखभाल

अक्सर देखा जाता है कि पौधरोपण के बाद रख-रखाव की कमी से पौधे मर जाते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए वन विभाग ने सख्त शर्त रखी है। ये सभी एजेंसियां अगले पांच वर्षों तक अपने खर्च पर इन पौधों की देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएंगी। जब तक ये पौधे बड़े होकर आत्मनिर्भर नहीं हो जाते, तब तक इनकी फेंसिंग और खाद-पानी का प्रबंध इन संस्थाओं को ही करना होगा।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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