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अरावली की नई परिभाषा से डर क्यों? हरियाणा से दिल्ली तक बन सकती है मुसीबत: एक्सपर्ट

अरावली की नई परिभाषा से डर क्यों? हरियाणा से दिल्ली तक बन सकती है मुसीबत: एक्सपर्ट

संक्षेप:

अरावली की बदलती परिभाषा और नए नियमों से विशेषज्ञों ने वन क्षेत्र घटने की चिंता जताई है, जिसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता और हरियाणा के भूजल स्तर पर पड़ने की आशंका है।

Dec 25, 2025 07:27 am ISTAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, गौरव चौधरी। गुरुग्राम
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अरावली की सुरक्षा को लेकर बनाए जा रहे नए नियमों और बदलती परिभाषा ने पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई परिभाषा के तहत अरावली के दायरे को सीमित किया गया, तो प्रदेश का पहले से ही कम वन क्षेत्र और भी सिकुड़ जाएगा।

इसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर में शामिल गुरुग्राम और फरीदाबाद जिले की वायु गुणवत्ता और भूजल स्तर पर सीधा पड़ेगा। साल 2023 में फोरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) के द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का भौगोलिक क्षेत्र 44 हजार 212 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से सिर्फ एक हजार 614.26 वर्ग किलोमीटर में वन क्षेत्र है। प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र का सिर्फ 3.65 फीसदी ही वन क्षेत्र है। राष्ट्रीय नीति यह कहती है कि हर राज्य को अपने भौगोलिक क्षेत्र का 33 फीसदी इलाके में वन क्षेत्र विकसित करना चाहिए।

पर्यावरणविद् वैशाली राणा ने बताया कि वर्तमान में गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिने जाते हैं। अभी जब अरावली के कुछ हिस्से सुरक्षित हैं, तब यह हाल है। अगर इसके अस्तित्व से छेड़छाड़ हुई और पेड़ों की कटाई बढ़ी, तो प्रदूषण का स्तर काफी खराब होगा।

तीन राज्यों में अरावली के वन क्षेत्र की स्थिति

राज्यभौगोलिक क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)अरावली वन क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)प्रतिशत (%)
दिल्ली1,483195.2813.17
हरियाणा44,2121,614.263.65
राजस्थान3,42,23916,548.214.84
अरावली संकट

हरियाणा के ग्रीन जोन का गणित

पर्यावरणविद सुनील हरसाना के अनुसार अरावली हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, रेवाड़ी, पलवल और महेंद्रगढ़ जिलों की जीवनरेखा है। आंकड़ों के जरिए उन्होंने स्थिति की गंभीरता को साझा किया। उन्होंने बताया कि कुल वन क्षेत्र: इन छह जिलों में अरावली का वन क्षेत्र 487.08 वर्ग किलोमीटर में फैला है। हरियाणा के कुल 3.65% वन क्षेत्र में से 1.10% हिस्सा अकेले इन छह जिलों की अरावली पहाड़ियों से आता है।

एनसीआर की स्थिति बिगड़ेगी

विशेषज्ञ चेतन अग्रवाल के अनुसार किसी भी राज्य के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कुल भू-भाग का एक-तिहाई (करीब 33%) हिस्सा वन क्षेत्र होना चाहिए। विशेषज्ञों का तर्क है कि अरावली दक्षिण हरियाणा के लिए फेफड़ों का काम करती है। नए नियमों के जरिए अरावली की जमीन को गैर-वानिकी कार्यों के लिए खोला गया, तो दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना दूभर हो जाएगा।

राजस्थान में अधिक हरियाली

एफएसआई की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हैरानी की बात यह है कि रेतीले धारों वाले राजस्थान में हरियाणा से अधिक हरियाली है। राजस्थान में कुछ क्षेत्रफल में से 4.84% वन क्षेत्र है। इसके अलावा दिल्ली का कुल क्षेत्रफल का 13.17% वन क्षेत्र है। ऐसे में सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा में होने की संभावना है। इससे भविष्य में खतरा और बढ़ेगा।

Aravalli Range

छह जिलों पर मंडराता खतरा

पर्यावरणविद सुनील हरसाना का मानना है कि अरावली केवल पत्थर और पहाड़ नहीं हैं, बल्कि यह एक सुरक्षा कवच है। अरावली के कारण ही दिल्ली-एनसीआर के लोगों को पानी और साफ हवा मिल रही है। अरावली में छेड़छाड़ की गई तो गुरुग्राम और फरीदाबाद जिले में हवा और जहरीली हो जाएगी। अरावली की पहाड़ियां जल पुनर्भरण का मुख्य स्रोत हैं, ये नष्ट हुई तो छह जिले सूखे की चपेट में आ सकते हैं।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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