अंकित हिंदू था इसलिए मार डाला, मुसलमान दोस्त भी बन गए कातिल; परिवार के जख्म आज भी ताजा
दिल्ली दंगों में मारे गए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के परिवार का दावा है कि हिंदू होने के कारण उनके बेटे को निशाना बनाया गया। उसके मुस्लिम दोस्त भी हत्यारों के साथ हो गए।

आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के लगभग छह साल बाद पूर्व स्थानीय पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया। अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार को राहत तो मिली है, लेकिन खालीपन का गहरा एहसास अब भी उन्हें परेशान कर रहा है। इस फैसले ने अंकित शर्मा के परिवार की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। अंकित शर्मा का परिवार अब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास स्थित अपने पैतृक घर में नहीं रहता है। शर्मा के परिवार का कहना है कि उनका दर्द पहले की तरह ही ताजा है। आरोप लगाया कि अंकित को हिंदू होने के कारण निशाना बनाया गया था।
इससे पहले सोमवार को जज प्रवीण सिंह की अदालत ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे के दौरान अंकित शर्मा की हत्या में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नजीम, कासिम और समीर खान को सोमवार को दोषी करार दिया।
अंकित शर्मा के साथ क्या हुआ था
छह साल पहले नाले में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का खून से लथपथ शव मिला था। घटना फरवरी 2020 की है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। दंगों में 53 लोग मारे गए थे। 25 फरवरी 2020 को अंकित घर का सामान लेने के लिए घर से निकले और उसके बाद लापता हो गए। पुलिस ने दावा किया कि भीड़ उन्हें अगवा कर ले गई, उनकी हत्या कर दी और उसके शव को नाले में फेंक दिया।
हत्यारों ने 52 बार चाकू से गोदा था
पुलिस के मुताबिक, उसे 52 बार चाकू मारा गया था। उसका शव अगली सुबह नाले से बरामद किया गया। परिवार ने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और उस जगह पर रहने के सदमे के कारण वे दंगों के तुरंत बाद वहां से चले गए थे।
हिंदू होने के कारण निशाना बनाया
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में परिवार ने आरोप लगाया कि अंकित को हिंदू होने के कारण निशाना बनाया गया था। अंकित के बड़े भाई अंकुर ने कहा कि "मेरे भाई ने देश के लिए बलिदान दिया है। उसकी हत्या के सभी आरोपियों के लिए मौत की सजा मिलनी चाहिए।" अंकुर आगे कहते हैं कि “हर गली पार करते समय हमें वो घटना याद आ जाती थी। हर बार नाला पार करते हुए हमारा दिल बहुत भारी हो जाता था। वो यादें कभी नहीं मिटी। इसलिए हम वहां से निकल गए और तब से किराए के मकान में रह रहे हैं।”
हत्यारों को भी वो दर्द मिले
अंकुर ने जोर देकर कहा, “उन हत्यारों को भी वही दर्द मिलना चाहिए जो हमने सहा है। मेरा भाई मिलनसार व्यक्ति था जो हिंदू और मुसलमान दोनों से मेलजोल रखता था। उसके मन में किसी के प्रति कोई भेदभाव नहीं था, लेकिन जब उस पर हमला हुआ, तो उसके मुस्लिम दोस्तों ने भी इस अपराध में साथ दिया।”
आज भी तनाव में है परिवार
अंकित की हत्या का परिवार पर भावनात्मक असर पड़ा है। अंकित के माता-पिता हाई बीपी से पीड़ित हैं और दंगों या उससे जुड़े किसी भी मामले में चर्चा के बाद तनाव में आ जाते हैं। परिवार ने दोहराया कि उन्हें न्याय तभी मिलेगा जब इस मामले में दोषी ठहराए गए सभी लोगों को फांसी या अधिकतम सजा मिलेगी।
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