फरीदाबाद पर भी अमेरिका-ईरान युद्ध की छाया, शादी के सीजन में जोड़ों के सपने टूटे
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध की छाया फरीदाबाद पर भी पड़ती दिख रही है। इस युद्ध ने शादी के सीजन में विदेश जाकर यादगार पल बिताने की हसरत रखने वाले जोड़ों के सपनों को भी चूर कर दिया है। अनिश्चितता के माहौल में वे अपनी ट्रिप कैंसिल करने को मजबूर हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध की छाया फरीदाबाद पर भी पड़ती दिख रही है। इस युद्ध ने शादी के सीजन में विदेश जाकर यादगार पल बिताने की हसरत रखने वाले जोड़ों के सपनों को भी चूर कर दिया है। अनिश्चितता के माहौल में वे अपनी ट्रिप कैंसिल करने को मजबूर हैं।
स्मार्ट सिटी से दुबई, अबूधाबी और मस्कट जैसे खाड़ी देशों में प्री-वेडिंग शूट और हनीमून की बुकिंग कराने वाले लोगों को निराशा हाथ लगी है। अनिश्चितता के माहौल में वे अपनी ट्रिप कैंसिल करने को मजबूर हैं। स्मार्ट सिटी हर साल ढाई से तीन हजार लोग यूएई, दुबई, अबूधाबी, मस्कट सहित अनेक खाड़ी देशों में घूमने, प्री-वेडिंग शूटिंग और हनीमून के लिए जाते हैं।
बुकिंग कैंसल कराना शुरू कर दिया
जनवरी से अब तक विभिन्न ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से अब तक करीब 170 से अधिक बुकिंग इन देशों के लिए हुई थी। युद्ध के हालात में लोगों ने अपनी बुकिंग कैंसल कराना शुरू कर दिया है। हालांकि दोस्तों के साथ दुबई ट्रिप पर जाने वाले ग्रुप अभी युद्ध के हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि अप्रैल में टूर है, उम्मीद है कि तब तक युद्ध रुक जाएगा।
योजना रद्द करने पर मजबूर
वहीं सेक्टर-15 निवासी एक युवा व्यवसायी की शादी इसी साल अप्रैल में तय हुई है। उन्होंने दुबई की मशहूर एमजीएम इवेंट्स के जरिए बुर्ज खलीफा और रेगिस्तानी सफारी के बीच प्री-वेडिंग शूट की भव्य तैयारी की थी। फ्लाइट की टिकटों से लेकर होटलों की बुकिंग तक सब कुछ फाइनल था, लेकिन युद्ध की आहट और हवाई क्षेत्र के असुरक्षित होने की खबरों ने उन्हें अपनी योजना रद्द करने पर मजबूर किया।
फ्लाइट्स की बुकिंग में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट
पर्यटन विशेषज्ञों ने बताया कि फरवरी से अप्रैल तक खाड़ी देश भारतीयों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन रहते हैं। हालांकि, ताजा हालातों के बाद दुबई, अबूधाबी, दोहा और मस्कट जाने वाली फ्लाइट्स की बुकिंग में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आई है।
दक्षिण-पूर्व एशिया भी प्रभावित
एनआईटी स्थित एक ट्रेवल कंपनी के संचालक सौरभ कुमार ने बताया कि हवाई ईंधन की कीमतों में उछाल और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का रद्द होने से लोग अब मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे देशों की यात्रा टालने लगे हैं। कई जोड़ों ने मार्च के अंत में बैंकॉक और कुआलालंपुर की यात्रा बुक की थी, लेकिन अब वे रिफंड मांग रहे हैं या ट्रिप को आगे बढ़ा रहे हैं।
उदयपुर-जैसलमेर को प्राथमिकता दे रहे
ट्रैवल कंपनी संचालक सौरभ कुमार ने बताया कि युद्ध की खबरों के बाद से पर्यटकों में डर का माहौल है। पिछले एक हफ्ते में हमारे पास दुबई और मस्कट की 15 से ज्यादा बुकिंग्स कैंसिल हुई हैं। लोग अब विदेश जाने के बजाय उदयपुर, जैसलमेर या केरल जैसे घरेलू विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वहीं, ट्रेवल सलाहकार अमित भाटिया ने बताया कि हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित होने और फ्लाइट्स के रूट बदलने से हवाई किराए में भी भारी उछाल आया है। यह प्री-वेडिंग शूट 3 लाख में हो रहा था, उसका खर्च अब 4 लाख के पार जा रहा है। इसी कारण फरीदाबाद के कई जोड़ों ने अपनी खाड़ी देशों की यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


