
आतंकी डॉक्टरों की पनाहगाह बनी अल फलाह यूनिवर्सिटी में भी फर्जीवाड़ा, हुआ यह बड़ा खुलासा
कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि विश्व विद्यालय की वेबसाइट पर दी गई NAAC से जुड़ी जानकारी पूरी तरह से गलत है और इसके जरिए विश्व विद्यालय द्वारा जनता विशेषकर अभिभावकों, छात्रों और हितधारकों को गुमराह किया जा रहा है।
दिल्ली में लाल किला के पास सोमवार को हुए कार धमाके के बाद चर्चा के केंद्र बन चुके फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के बारे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। विश्व विद्यालयों का मूल्यांकन और उन्हें मान्यता देने वाली संस्था NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) ने इस बात की पुष्टि की है कि फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय को न तो उसके द्वारा मान्यता दी गई है और न ही उसने संस्था के पास मान्यता के लिए आवेदन किया था। इसके साथ अपनी वेबसाइट पर गलत मान्यता प्रदर्शित करने के लिए ही NAAC ने अल-फलाह विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। यह विश्वविद्यालय दिल्ली विस्फोट मामले की जांच के घेरे में है।
क्यों ना आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करें?
NAAC की तरफ से विश्वविद्यालय को जारी कारण बताओ नोटिस में कई तीखे सवाल पूछे गए हैं और संस्थान से कई नियामक और कानूनी आधारों पर जवाब मांगा गया है। नोटिस में विश्वविद्यालय से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि उसके खिलाफ कानूनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए और उसे NAAC द्वारा A&A के लिए भविष्य में किसी भी विचार से अयोग्य क्यों न घोषित कर दिया जाए। दरअसल आतंकवादी साजिश के सिलसिले में इस विश्वविद्यालय में कार्यरत कई डॉक्टरों की हुई गिरफ्तारी के बाद इस संस्थान को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और इसी वजह से उसकी अच्छे से जांच की जा रही है।
वेबसाइट पर दी भ्रामक जानकारी, बताया मान्यता प्राप्त
विवि को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय को मान्यता नहीं होने के बाद भी उसने अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है कि ‘अल-फलाह विश्वविद्यालय अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का एक उपक्रम है, जो परिसर में तीन कॉलेज चला रहा है- अल फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1997 से, NAAC द्वारा ग्रेड A प्राप्त), ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (2008 से) और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (2006 से, NAAC द्वारा ग्रेड A प्राप्त)।’
NAAC संबंधी विवरणों को हटाने को कहा
कारण बताओ नोटिस में कहा गया है, ‘ विवि की वेबसाइट पर दी गई यह जानकारी पूरी तरह से गलत है और इसके जरिए विश्व विद्यालय द्वारा जनता विशेषकर अभिभावकों, छात्रों और हितधारकों को गुमराह किया जा रहा है।’ इसके साथ ही NAAC ने विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगते हुए उसे निर्देश दिया है कि वह अपनी वेबसाइट तथा अन्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध या वितरित दस्तावेजों से NAAC मान्यता संबंधी विवरण व दावों को हटा दे।
विवि को जारी नोटिस में आगे सवाल उठाया गया है कि NAAC को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को UGC अधिनियम की धारा 2(f) और 12B के तहत अल-फलाह विश्वविद्यालय की मान्यता वापस लेने की सिफारिश क्यों नहीं करनी चाहिए। NAAC ने यह भी पूछा है कि उसे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) को विश्वविद्यालय के संबंधित कार्यक्रमों की मान्यता वापस लेने की सलाह क्यों नहीं देनी चाहिए।
NAAC क्या है?
NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद) भारत सरकार का एक स्वायत्त सार्वजनिक निकाय है जो उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन करता है और उन्हें प्रमाणित या अधिकृत करता है।
बता दें कि सोमवार शाम को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में एक उच्च-तीव्रता वाला विस्फोट हुआ था, जिसमें 13 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। यह घटना आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के एक ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ के भंडाफोड़ के कुछ ही घंटों बाद हुई थी। इस सिलसिले में गिरफ्तार लोगों में अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े तीन चिकित्सक भी शामिल हैं। जांचकर्ताओं ने पता लगाया है कि आतंकी साजिश की जड़ विश्वविद्यालय परिसर की बिल्डिंग 17 का कमरा नंबर 13 था, जो उनके अनुसार योजना और समन्वय केंद्र के रूप में काम कर रहा था।
व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का सेंटर बनी यह यूनिवर्सिटी
फरीदाबाद के गांव धौज की अल फलाह यूनिवर्सिटी इस आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद बुरी तरह से शक के दायरे में आ गई है। शिक्षा की आड़ में धार्मिक कट्टरपंथी का सेंटर बनी इसी यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टर डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. उमर नबी यहीं बने मेडिकल कॉलेज से जुड़े थे। डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. उमर नबी का करियर पहले भी दागदार रहा है। इनके अलावा इस मॉड्यूल में शामिल डॉ. निसार-उल-हसन का करियर भी विवादों में रहा है।
डॉ. उमर नबी को जम्मू कश्मीर के एक मेडिकल कॉलेज से रेडिकलाइजेशन के लिए निकाला गया था। डॉ. निसार-उल-हसन को साल 2023 में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल आतंकियों से संबंध रखने के कारण नौकरी से बर्खास्त किया गया था। वहीं, डॉ. शाहीन शाहिद को भी कई साल तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी से गैर हाजिर रहने की वजह से निकाल दिया गया था। दिलचस्प पर हैरानी की बात ये है कि इन तीनों को अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी पर रख लिया गया था। जांच एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी के 70 एकड़ के विशाल कैंपस को छान रही हैं।





