मुझ तक कैसे पहुंच गया स्याही फेंकने वाला, नेहा बोरा ने सुरक्षा पर उठाया सवाल; जांच की मांग
आइसा की प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने खुद पर स्याही फेंकने की घटना को लेकर सुरक्षा पर सवाल उठाया है। बोरा ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों के रहते वह आदमी उन तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच होनी चाहिए। बोरा ने झारखंड सरकार से अपील की है कि वह छात्रों की मांगों को सुने और उन्हें स्वीकार करे।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने स्याही फेंकने की घटना के बाद सुरक्षा में हुई चूक के लिए प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि एक संदिग्ध व्यक्ति भारी पुलिस घेरे को पार करके सार्वजनिक रैली के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों तक कैसे पहुंच गया। एएनआई से बात करते हुए बोरा ने वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही की आलोचना की। साथ ही इस बात की आधिकारिक जांच की मांग की कि हमलावर उन तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग की।
नेहा बोरा ने कहा कि जिस व्यक्ति ने स्याही फेंकी, उसका नाम अमरनाथ पांडे है। वह 26 साल का है। हजारीबाग का रहने वाला यह शख्स आरएसएस का सदस्य है। हम चाहते हैं कि पुलिस और प्रशासन अपना काम करें और हमें बताए कि वह हमारे विरोध प्रदर्शन तक कैसे पहुंचा। हमारे मार्च के आस-पास पुलिस बल तैनात था। वह व्यक्ति उस जगह तक कैसे पहुंच गया जहां महिलाएं खड़ी थीं और उसने स्याही फेंक दी?
आइसा प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने देश भर में चल रहे छात्र आंदोलन के मजबूत जज़्बे और लगातार बनी हुई ऊर्जा पर भी जोर दिया। जंतर-मंतर और देश भर में हुए विरोध-प्रदर्शनों ने यह संभावना जगा दी है कि आप अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। सत्ता पक्ष आपसे कह सकता है कि आपका लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन है, लेकिन आप अपने संघर्ष के लक्ष्यों को पा सकते हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि झारखंड के छात्रों ने उस आंदोलन की ऊर्जा को बनाए रखा है। मैं सरकार से अपील करती हूं कि वह उनकी मांगों को सुने और उन्हें स्वीकार करे।
आइसा ने भी उन शरारती तत्वों की कड़ी आलोचना की जिन्होंने महिला कार्यकर्ताओं पर स्याही फेंकी, जबकि वे नौकरी की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर राज्य प्रशासन से सवाल पूछ रही थीं। जन-आंदोलन के मुख्य मुद्दे पर जोर देते हुए आइसा की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि आइसा उन उपद्रवियों की निंदा करता है जिन्होंने रांची में चल रहे प्रदर्शन में बाधा डाली और नेहा तथा अन्य महिला प्रदर्शनकारियों पर स्याही फेंकी। ये महिलाएं JPSC और JSSC पेपर लीक घोटाले को लेकर झारखंड सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही थीं और प्रदर्शन में शामिल थीं।
प्रेस रिलीज में आगे कहा गया है कि यह व्यवहार सिर्फ यह दिखाता है कि कौन लोग आवाज उठाने वालों से डरते हैं। कल से ही बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोग नेहा के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के खिलाफ प्रोपेगैंडा और नफरत फैलाने वाला अभियान चला रहे हैं। आज की घटना को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। आइसा इस शर्मनाक हरकत की निंदा करता है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता है। आइसा झारखंड में छात्रों के लिए न्याय की अपनी लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध है और मांग करता है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तुरंत इस मुद्दे को सुलझाएं और छात्रों की चिंताओं पर ध्यान दें।


