वांगचुक के साथ 22 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे AISA के 3 सदस्य कौन हैं? जबरन हटाने का लगाया आरोप
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद भी AISA के तीन सदस्य- नेहा बोरा, आमीन अमितोज और मनीष कुमार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस उन्हें भी जबरन हटाने की कोशिश कर रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि उसकी कार्रवाई अदालत के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह पर है।

जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से सोशल एक्टविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन अस्पताल ले गई है। अब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन अनशनकारी छात्र नेताओं पर सभी की नजरें टिक गई हैं। संगठन का दावा है कि उसके तीनों कार्यकर्ता अब भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हैं। उनका आरोप है कि सरकार और दिल्ली पुलिस उन्हें भी जबरन हटाने की कोशिश कर रही है।
रविवार सुबह जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। AISA की ओर से दावा किया गया कि पुलिस और रैपिड फोर्स (RF) के जवान कई बार अनशन स्थल तक पहुंचे। इसे देखते हुए प्रदर्शनकारियों और समर्थकों ने तीनों अनशनकारियों के चारों ओर मानव श्रृंखला बना दी, ताकि उन्हें हिरासत में न लिया जा सके।
कौन हैं अनशन पर बैठे तीनों छात्र नेता?
- अनशन कर रही नेहा बोरा AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय में पीएचडी कर रही हैं। संगठन के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद उनका करीब 7.5 किलोग्राम वजन कम हो चुका है।
- दूसरे अनशनकारी आमीन अमितोज हैं। वह दिल्ली की डॉ. बी.आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी में अर्बन स्टडीज के पीएचडी रिसर्चर हैं। पंजाब के रहने वाले आमीन 2020-21 के किसान आंदोलन में भी सक्रिय रहे थे। AISA का दावा है कि अनशन के दौरान उनका 9.3 किलोग्राम वजन कम हुआ है।
- तीसरे अनशनकारी मनीष कुमार हैं। वह AISA के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान से पीएचडी कर रहे हैं। संगठन के मुताबिक, भूख हड़ताल के दौरान उनका 10.4 किलोग्राम वजन घट चुका है।
पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह कई बार पुलिस और रैपिड फोर्स के जवान उन्हें हटाने के लिए पहुंचे। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें हिरासत में लिए जाने से रोका। नेहा ने समर्थकों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के आरोपों से भी इनकार किया है।
CJP और AISA की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से जुड़े मामलों में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद भी छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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