एयर शो के लिए आसमान को यूं खाली कराएगी दिल्ली सरकार, दिया 1,275 किलोग्राम चिकन का ऑर्डर
अधिकारी ने बताया कि यह प्रैक्टिस 15 जनवरी से 26 जनवरी के बीच शहर भर में 20 स्थानों पर की जाएगी, जिसमें लाल किला और जामा मस्जिद जैसे संवेदनशील इलाके भी शामिल हैं, जहां आमतौर पर बड़ी संख्या में चीलें देखी जाती हैं।

दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर होने वाले मुख्य समारोह के दौरान होने वाले एयर शो के दौरान आसमान को चीलों, बाज, गिद्ध व अन्य पक्षियों से मुक्त रखने के लिए दिल्ली वन विभाग ने खास तैयारी की है। इस दौरान विभाग ने उन्हें बिना हड्डी वाला मांस परोसने की योजना बनाई है। दरअसल हवाई शो के दौरान जेट व अन्य लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं, इस दौरान इन पक्षियों, विशेष तौर पर काली चील के आने से करतब दिखाने में परेशानी हो सकती है, साथ ही खतरा भी पैदा हो सकता है। इसलिए इन पक्षियों की आवाजाही को मैनेज करने और उन्हें विमानों के रास्ते से दूर रखने के लिए वन विभाग द्वारा 1275 किलोग्राम बिना हड्डी वाले चिकन का इस्तेमाल करते हुए उसे आसमान से गिराया जाएगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मांस फेंकने की यह कवायद हर साल एयर शो से पहले भारतीय वायु सेना (IAF) के साथ मिलकर की जाती है, जिसका मकसद पक्षियों को विमानों से टकराने से रोकना होता है। अधिकारी ने आगे कहा कि एयर शो के दौरान विमान कम ऊंचाई पर उड़ते हैं ऐसे में ये पक्षी इन विमानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। अधिकारी ने कहा कि इससे पहले तक इस काम के लिए भैंसे के मांस का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन इस साल से इसमें बदलाव करते हुए वन विभाग ने चिकन मांस के इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
अधिकारी ने आगे कहा, 'पहले इस काम के लिए भैंस के मांस का इस्तेमाल किया जाता था। इस साल पहली बार चिकन मांस का इस्तेमाल किया जाएगा।'
उन्होंने बताया कि यह प्रैक्टिस 15 जनवरी से 26 जनवरी के बीच शहर भर में 20 स्थानों पर की जाएगी, जिसमें लाल किला और जामा मस्जिद जैसे संवेदनशील इलाके भी शामिल हैं, जहां आमतौर पर बड़ी संख्या में चीलें देखी जाती हैं। वहीं अभ्यास के लिए चुनी गई अन्य जगहों में मंडी हाउस, दिल्ली गेट और मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के पास के इलाके भी शामिल हैं। हर जगह लगभग 20 किलोग्राम मांस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सभी जगहों पर हर दिन इस्तेमाल होने वाले चिकन की कुल मात्रा लगभग 400 किलोग्राम हो जाएगी।
अधिकारी ने कहा, 'इन जगहों की पहचान हर साल पक्षियों की आवाजाही के पैटर्न के आधार पर की जाती है। लाल किला और जामा मस्जिद जैसे इलाकों में चीलों की संख्या ज़्यादा होती है, जिससे पक्षियों के उड़ान मार्ग में भटकने का खतरा बढ़ जाता है। उन्हें तय जगहों पर खाना खिलाकर, हम यह सुनिश्चित करते हैं कि वे एयर शो के रास्ते से दूर रहें और उन्हें पर्याप्त खाना भी मिलता रहे।'
इस प्रैक्टिस की प्रक्रिया समझाते हुए अधिकारी ने बताया कि इसमें तय जगहों पर हवा में चिकन मांस के छोटे-छोटे टुकड़े फेंकना शामिल है ताकि पक्षी कम ऊंचाई पर व्यस्त रहें और हवाई मार्गों की ओर न उड़ें। अधिकारी ने बताया, 'यह एक्सरसाइज इवेंट से लगभग 15 दिन पहले बार-बार की जाती है, ताकि पक्षी खाने के पैटर्न के आदी हो जाएं। इसका मकसद यह पक्का करना है कि गणतंत्र दिवस एयर शो के दौरान, पक्षी फ्लाइट पाथ में न आएं और विमानों के लिए कोई खतरा पैदा न करें।'
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