Hindi Newsएनसीआर Newsair pollution acute respiratory illness ari 2 lakh cases delhi three years
दिल्ली में लोगों के फेफड़ें खराब कर रहा प्रदूषण, सरकार ने संसद में बताए डराने वाले आंकड़े

दिल्ली में लोगों के फेफड़ें खराब कर रहा प्रदूषण, सरकार ने संसद में बताए डराने वाले आंकड़े

संक्षेप:

स्वास्थ्य मंत्रालय ने संसद को बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण और सांस की गंभीर बीमारियों (ARI) के बीच गहरा संबंध है, जिसके कारण अकेले दिल्ली में पिछले तीन सालों में 2 लाख से ज़्यादा लोग ARI की चपेट में आए और हर साल औसतन 10 हज़ार से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

Wed, 3 Dec 2025 07:50 AMAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

भारत के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सीधे लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में बताया कि प्रदूषण और सांस की गंभीर बीमारियों (Acute Respiratory Illness - ARI) के बीच मजबूत संबंध दिख रहा है। अकेले दिल्ली में 2022 से 2024 के बीच 2 लाख से ज्यादा ARI के मामले दर्ज हुए, जिनमें हर साल हजारों मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

तीन साल में दिल्ली के अस्पतालों के चौंकाने वाले आंकड़े

2022: 67,054 इमरजेंसी मामले, 9,878 भर्ती

2023: 69,293 इमरजेंसी मामले

2024: 68,411 इमरजेंसी मामले, भर्ती बढ़कर 10,819 हुईं

इन तीन सालों में हर साल औसतन 10 हजार से ज्यादा लोग गंभीर सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल पहुंचे। प्रदूषण के सबसे खराब दिनों में चेन्नई और मुंबई के अस्पतालों में भी सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। हजारों लोग इमरजेंसी में पहुंचे।

प्रदूषण बड़ा ट्रिगर

राज्यसभा में सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी के सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “प्रदूषित हवा सांस की बीमारियों को ट्रिगर करने वाला प्रमुख कारक है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ प्रदूषण ही एकमात्र वजह नहीं है। खान-पान, नौकरी का प्रकार, आर्थिक स्थिति, इम्यूनिटी और पुरानी बीमारियां भी मिलकर कुछ लोगों को ज्यादा जोखिम में डालती हैं।

अब हर दिन निगरानी हो रही

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में निगरानी बढ़ा दी है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) ने 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 230 से ज्यादा सेंटिनल साइट्स शुरू की हैं। अगस्त 2023 से डिजिटल ARI सर्विलांस शुरू हो चुका है, जो हेल्थ पोर्टल के जरिए रोजाना डेटा जुटाता है।

आईसीएमआर ने पांच बड़े अस्पतालों में 33,213 मरीजों पर अध्ययन किया। नतीजा साफ था – जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ा, सांस की तकलीफ लेकर इमरजेंसी पहुंचने वालों की संख्या भी बढ़ी। मंत्रालय ने कहा कि यह अध्ययन सीधे तौर पर कारण साबित नहीं करता, लेकिन वैश्विक शोधों के साथ इसका संबंध पूरी तरह मेल खाता है।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , Delhi Blast, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।