
दिल्ली में लोगों के फेफड़ें खराब कर रहा प्रदूषण, सरकार ने संसद में बताए डराने वाले आंकड़े
स्वास्थ्य मंत्रालय ने संसद को बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण और सांस की गंभीर बीमारियों (ARI) के बीच गहरा संबंध है, जिसके कारण अकेले दिल्ली में पिछले तीन सालों में 2 लाख से ज़्यादा लोग ARI की चपेट में आए और हर साल औसतन 10 हज़ार से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
भारत के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सीधे लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में बताया कि प्रदूषण और सांस की गंभीर बीमारियों (Acute Respiratory Illness - ARI) के बीच मजबूत संबंध दिख रहा है। अकेले दिल्ली में 2022 से 2024 के बीच 2 लाख से ज्यादा ARI के मामले दर्ज हुए, जिनमें हर साल हजारों मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

तीन साल में दिल्ली के अस्पतालों के चौंकाने वाले आंकड़े
2022: 67,054 इमरजेंसी मामले, 9,878 भर्ती
2023: 69,293 इमरजेंसी मामले
2024: 68,411 इमरजेंसी मामले, भर्ती बढ़कर 10,819 हुईं
इन तीन सालों में हर साल औसतन 10 हजार से ज्यादा लोग गंभीर सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल पहुंचे। प्रदूषण के सबसे खराब दिनों में चेन्नई और मुंबई के अस्पतालों में भी सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। हजारों लोग इमरजेंसी में पहुंचे।
प्रदूषण बड़ा ट्रिगर
राज्यसभा में सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी के सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “प्रदूषित हवा सांस की बीमारियों को ट्रिगर करने वाला प्रमुख कारक है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ प्रदूषण ही एकमात्र वजह नहीं है। खान-पान, नौकरी का प्रकार, आर्थिक स्थिति, इम्यूनिटी और पुरानी बीमारियां भी मिलकर कुछ लोगों को ज्यादा जोखिम में डालती हैं।
अब हर दिन निगरानी हो रही
स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में निगरानी बढ़ा दी है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) ने 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 230 से ज्यादा सेंटिनल साइट्स शुरू की हैं। अगस्त 2023 से डिजिटल ARI सर्विलांस शुरू हो चुका है, जो हेल्थ पोर्टल के जरिए रोजाना डेटा जुटाता है।
आईसीएमआर ने पांच बड़े अस्पतालों में 33,213 मरीजों पर अध्ययन किया। नतीजा साफ था – जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ा, सांस की तकलीफ लेकर इमरजेंसी पहुंचने वालों की संख्या भी बढ़ी। मंत्रालय ने कहा कि यह अध्ययन सीधे तौर पर कारण साबित नहीं करता, लेकिन वैश्विक शोधों के साथ इसका संबंध पूरी तरह मेल खाता है।





