एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट जब 300 फीट तक नीचे गिरी तो क्या हुआ? महिला यात्री ने सब बताया
फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस के दौरान विमान के करीब 300 फीट नीचे गिरने का दावा किया गया। यात्री शिल्पी जैन ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा कर कई यात्रियों और केबिन क्रू के घायल होने की बात कही।

थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट हाल ही में भीषण टर्बुलेंस की चपेट में आ गई थी। इस दौरान विमान के करीब 300 फीट नीचे गिरने का दावा किया गया है। इस घटना के बाद विमान में सवार कई यात्रियों और केबिन क्रू के घायल होने की बात सामने आई है। फ्लाइट में मौजूद यात्री शिल्पी जैन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर पूरे घटनाक्रम को बताया और इसे अपनी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव करार दिया।
विमान के नीचे गिरने से छतों से जा टकराए यात्री
वीडियो में शिल्पी जैन ने अपना बोर्डिंग पास दिखाते हुए बताया कि वह फ्लाइट में सीट नंबर 23F पर बैठी थीं। उन्होंने कहा कि फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में अचानक तेज टर्बुलेंस आया, जिसके बाद विमान तेजी से नीचे की ओर गिरा। उनके मुताबिक, इस झटके के कारण कई यात्री अपनी सीटों से उछल गए और कुछ लोग विमान की छत से टकरा गए। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान कई यात्रियों के साथ-साथ केबिन क्रू के सदस्य भी घायल हुए।
क्रू मेंबर ने मदद की, लेकिन…
शिल्पी ने कहा कि घटना के दौरान विमान के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि उन्होंने केबिन क्रू की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने स्थिति को संभालने की पूरी कोशिश की। लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्रू ने यात्रियों से घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का अनुरोध किया। शिल्पी के अनुसार, क्रू ने कहा था कि इससे एयरलाइन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।
लखनऊ में लैंडिंग क्यों नहीं कराई? लगाए गंभीर आरोप
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि स्थिति इतनी गंभीर थी तो विमान को बीच रास्ते किसी नजदीकी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग क्यों नहीं कराई गई। उनका कहना था कि यदि कोई तकनीकी समस्या नहीं थी, तो यात्रियों को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए थी।
दिल्ली पहुंचने के बाद भी उन्होंने व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। शिल्पी ने आरोप लगाया कि घायल यात्रियों को तुरंत पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। उनके मुताबिक, कई यात्रियों को स्ट्रेचर की जगह व्हीलचेयर के सहारे ले जाया गया और उन्हें कुछ समय तक इंतजार भी करना पड़ा। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Near to death experience in Air India today.”
क्या बोले सोशल मीडिया यूजर
हालांकि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस मामले में अलग राय भी रखी। खुद को केबिन क्रू सदस्य बताने वाले एक यूजर ने लिखा कि क्लियर एयर टर्बुलेंस (CAT) पूरी तरह अप्रत्याशित होती है और इसका विमान की तकनीकी स्थिति से कोई संबंध नहीं होता। यह किसी भी एयरलाइन और किसी भी उड़ान के साथ हो सकता है। उन्होंने यात्रियों से सुरक्षित लैंडिंग के लिए पायलट और केबिन क्रू का आभार जताने की अपील की।
एक अन्य यूजर ने बताया कि उनके भाई के साथ भी एक साल पहले इंडिगो की फ्लाइट में ऐसा ही अनुभव हुआ था, लेकिन वह खबरों में नहीं आया। कई लोगों ने यात्रियों को सलाह दी कि सीट बेल्ट का संकेत बंद होने के बाद भी संभव हो तो सीट बेल्ट बांधे रखें, क्योंकि टर्बुलेंस कभी भी आ सकता है। कई कमेंट्स में यह भी कहा गया कि टर्बुलेंस का मुख्य कारण मौसम की स्थिति होती है और इसे विमान या एयरलाइन की खराबी से जोड़ना सही नहीं है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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