एयर इंडिया की लापरवाही से विदेशी धरती पर मिली ‘सजा’, वतन में इंसाफ

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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परदेस में जब सम्मान छिन जाए और इंसान खुद को बेबस महसूस करे तो हर पल एक सजा बन जाता है। मालवीय नगर की नसरीन राणा और कंचन ठाकुर के साथ सिंगापुर में कुछ ऐसा ही हुआ। एयर इंडिया की लापरवाही से सिंगापुर एयरपोर्ट पर दोनों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार हुआ।

एयर इंडिया की लापरवाही से विदेशी धरती पर मिली ‘सजा’, वतन में इंसाफ

परदेस में जब सम्मान छिन जाए और इंसान खुद को बेबस महसूस करे तो हर पल एक सजा बन जाता है। मालवीय नगर की नसरीन राणा और कंचन ठाकुर के साथ सिंगापुर में कुछ ऐसा ही हुआ। एयर इंडिया की लापरवाही से सिंगापुर एयरपोर्ट पर दोनों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार हुआ। वे ऐसे अपमान और मानसिक पीड़ा से गुजरीं, जिसे वे शायद जिंदगी भर न भूल सकें। लेकिन दर्दनाक अनुभव के बाद आखिरकार अपने देश में उन्हें न्याय मिला।

एयरलाइंस ने वैक्सीन को अमान्य करार दिया

मामला अप्रैल 2022 का है। नसरीन और कंचन को किसी काम से सिंगापुर जाना था। सिंगापुर एयरलाइंस ने उनकी स्पुतनिक-वी वैक्सीन को अमान्य बताते हुए बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया। इसके बाद दोनों ने एयर इंडिया से संपर्क किया। आरोप है कि एयर इंडिया के कर्मचारियों ने दस्तावेज की ठीक से जांच किए बिना उन्हें बोर्डिंग की अनुमति दे दी।

चार घंटे तक भूखे-प्यासे रखा गया

सिंगापुर एयरपोर्ट पर इन महिलाओं को इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया। उन्हें बताया गया कि वे बिना मान्य वैक्सीन के देश में प्रवेश नहीं कर सकतीं। इन महिला यात्रियों को चार घंटे तक बिना भाेजन पानी के एक कुर्सी पर बैठाए रखा गया। इसके बाद उन्हें एक जांच कक्ष में बंद कर दिया गया।

सुरक्षा शुल्क के नाम पर पैसे वसूले

हद तो तब हो गई जब उन्हें शौचालय के लिए भी कड़े पहरे में ले जाया गया,जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों। भारत वापसी से पहले उनसे सुरक्षा शुल्क के नाम पर जबरन 22,540 रुपये और वसूले गए। अपनों से दूर, अनजान देश में बेबसी के वे पल इन महिलाओं के लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं थे।

अदालत का ‘मरहम’ और सख्त संदेश

तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद दक्षिणी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की पीठ ने इस अमानवीय व्यवहार पर कड़ा संज्ञान लिया। आयोग ने माना कि एयर इंडिया ने न केवल सेवा में कोताही की, बल्कि यात्रियों को जानबूझकर गुमराह किया।

आयोग ने एयर इंडिया को टिकट के 3.11 लाख रुपये 6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और अपमान के लिए दोनों महिलाओं को 1-1 लाख का अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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