सर्जरी के लिए तारीख पर तारीख देने के आरोप; तन्वी की मौत पर AIIMS ने बनाई जांच कमेटी
एम्स दिल्ली में जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित 15 साल की बच्ची तन्वी की मौत के बाद सर्जरी में देरी के आरोपों पर जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। संस्थान ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
अदालतों में तारीख पर तारीख के मामले अक्सर सुने जाते हैं लेकिन देश के प्रसिद्ध अस्पताल एम्स दिल्ली पर सर्जरी के लिए डेट पर डेट देने के आरोप लगे हैं। जन्मजात जटिल दिल की बीमारी से पीड़ित 15 साल की तन्वी नाम की लड़की की मौत के बाद मामला चर्चा में है। अब एम्स दिल्ली के निदेशक ने पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। एम्स ने परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि अंतिम निष्कर्ष कमेटी और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही तय होंगे।
शुरू में कई जांचें, इसी में लग गए एक साल
तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने दावा किया कि मैं पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को बेटी के इलाज के लिए AIIMS दिल्ली OPD पहुंचा था। मैं रूम नंबर 14 में गया जहां से मुझको रूम नंबर 18 में भेजा गया। वहां डॉ. कोठारी ने कुछ शुरुआती टेस्ट किए। इस प्रक्रिया में लगभग एक साल का वक्त लग गया। इसके बाद मुझे रूम नंबर 4 में डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया। डॉ. सचिन तलवार ने मुझे पैसे और खून जमा करने के लिए कहा और कहा कि वह बच्ची का ऑपरेशन करेंगे।
2014 में खून और पैसे जमा किए लेकिन तारीख पर तारीख
मुकेश परियानी ने आगे कहा कि मैंने 4 अप्रैल 2014 को खून और पैसे जमा कर दिए। मुझे ऑपरेशन के लिए एक तारीख दी गई। मैं 2 सितंबर 2015 को गया तो मुझे बताया गया कि ऑपरेशन दिवाली के बाद होगा। मैंने 4 जनवरी के बाद फिर संपर्क किया तो टालमटोल किया गया। डॉक्टर ऑपरेशन को टालते रहे। इसके बाद मैंने एक और OPD विजिट की। थक हार कर मैंने PMO में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
पीएमओ में दी शिकायत वापस लेने का दबाव
मुकेश परियानी ने बताया कि पीएमओ में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद मुझको अस्पताल से फोन किया गया कि हम आ जाएं ताकि बच्ची की सर्जरी कर दी जाए। डॉ. सचिन तलवार ने बुलाया लेकिन फिर ऑपरेशन से इनकार कर दिया। मुकेश परियानी ने दावा किया कि मुझसे कहा गया कि जब तक शिकायत वापस नहीं ली जाती वह आगे नहीं बढ़ेंगे। हमने कई चक्कर लगाए लेकिन डॉक्टर हमें बार-बार टालते रहे।
फिर शिकायत दी तो बुलाया, लेकिन छुट्टी पर थे डॉक्टर
मुकेश परियानी ने कहा कि 2018 में मुझसे जरूरी जांचें करवाने के लिए कहा गया। हमनें फिर जांचें कराई लेकिन डॉक्टरों की ओर से हमें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। डाॅक्टरों की ओर से हमें बीमारी की प्रकृति के बारे में भी नहीं बताया गया। मैं 2023 में फिर गया लेकिन डॉक्टर ने ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मैंने 2025 में फिर से शिकायत दर्ज कराई। मुझे 28 जुलाई 2025 को बुलाया गया लेकिन जब हम पहुंचे तो डॉक्टर छुट्टी पर थे।
इंसाफ चाहिए
मुकेश परियानी ने आरोप लगाया कि हमें डॉक्टर ने कहा कि बच्ची दवा से ही ठीक हो जाएगी और उसे कोई समस्या नहीं है। उन्होंने हमें लौटा दिया। दवा लिखे जाने के बाद OPD कार्ड को लेकर मैंने 9 फरवरी, 2026 को शिकायत दर्ज कराई। डॉक्टर जांच पर जांच करते रहे लेकिन सर्जरी कभी नहीं की। आखिरकार मेरी बच्ची ने दम तोड़ दिया। मेरी बेटी का ऑपरेशन 2015, 2016 या 2017 में भी हो जाता तो वह ठीक हो जाती। मेरी बेटी की मौत के लिए जो भी जिम्मेदार हों उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। मुझे इंसाफ चाहिए।
एम्स दिल्ली ने बनाई कमेटी, इन एंगल पर जांच
अब एम्स नई दिल्ली के डायरेक्टर ने मामले की विस्तार से जांच करने और तथ्यों का पता लगाने के लिए कमेटी बनाई है। यह कमेटी तन्वी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और इलाज के दौरान की घटनाओं की समीक्षा करेगी। कमेटी घटनाओं के पूरे घटनाक्रम, क्लिनिकल रिकॉर्ड, इलाज, विशेषज्ञों की राय और मरीज की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की भी जांच करेगी। एम्स का कहना है कि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।


