काम की बात: गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन के इन 3 गांवों में बसेगी एयरोसिटी, लैंड पूलिंग से जमीन लेने का प्लान

Praveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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Aerocity Township Ghaziabad : गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) राजनगर एक्सटेंशन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास इस एयरोसिटी को बसाएगा। इसके लिए तीन गांवों की करीब 230 हेक्टेयर जमीन पर लैंड पूलिंग के जरिये लेने तैयारी की जा रही है।

गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन के इन 3 गांवों में बसेगी एयरोसिटी, लैंड पूलिंग से जमीन लेने का प्लान

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के तीन गांवों की करीब 230 हेक्टेयर जमीन पर लैंड पूलिंग के जरिये एयरोसिटी नाम से कमर्शियल टाउनशिप बसाने की तैयारी की जा रही है।

इन तीन गांवों की जमीन पर बसेगी टाउनशिप

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) राजनगर एक्सटेंशन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास इस एयरोसिटी को बसाएगा। यह टाउनशिप अटौर, मोरटी और मेवला अगरी की करीब 230.2232 हेक्टेयर भूमि पर विकसित होगी, जिसके लिए प्राधिकरण को तीन गांवों की करीब 200.2515 हेक्टेयर जमीन लेनी है। हालांकि, चिह्नित क्षेत्र में प्राधिकरण के पास 3.5977 हेक्टेयर जमीन पहले से मौजूद है, जबकि 16.2960 हेक्टेयर जमीन बंजर और 10.0780 हेक्टेयर भूमि योजना में पड़ने वाली झील की है। ऐसे में प्राधिकरण को अटौर गांव की 108.2604 हेक्टेयर भूमि, मोरटी गांव की 51.9754 हेक्टेयर जमीन और मेवला अगरी गांव की 40.0157 हेक्टेयर भूमि चाहिए।

लैंड पूलिंग से किसानों को क्या फायदा?

पूर्व में हुई जीडीए बोर्ड बैठक के दौरान इस भूमि को लेने के लिए बोर्ड ने तीन विकल्पों को स्वीकृति दी है, लेकिन प्राधिकरण लैंड पूलिंग के जरिये इस योजना को लाना चाहता है। इस विकल्प को प्राथमिकता देने से प्राधिकरण और किसान दोनों को फायदा होगा। जीडीए अधिकारी बताते हैं कि लैंड पूलिंग विकल्प को चुनने से प्राधिकरण को किसानों को मुआवजे के रुपये नहीं देने होंगे, बल्कि योजना को विकसित कर किसान को 25 फीसदी विकसित जमीन देनी होगी। इसके बाद किसान इस विकसित भूमि का लैंडयूज के अनुसार प्रयोग कर सकता है।

वीडियो भी तैयार किया

जीडीए ने लैंड पूलिंग के जरिये किसानों से जमीन लेने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस संबंध में प्राधिकरण की ओर से वीडियो जारी किया गया है। इसमें लैंड पूलिंग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि 25 फीसदी विकसित जमीन किसानों को दी जाएगी।

ये विकल्प भी मौजूद

जीडीए अधिकारी बताते हैं कि यदि किसान लैंड पूलिंग के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो प्राधिकरण द्वारा अन्य दो विकल्पों का सहारा लिया जाएगा। इसमें किसानों से आपसी सहमति बनाकर जमीन ली जाएगी। इस तरह जमीन लेने पर किसानों से प्राधिकरण बैनामा कराएगा, जिसके लिए उन्हें जमीन की कीमत दी जाएगी। वहीं, तीसरा विकल्प जमीन अधिग्रहण करने का होगा।

नंद किशोर कलाल, उपाध्यक्ष, जीडीए, ''अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास एयरोसिटी बसाई जाएगी। इसके लिए प्रयास किया जाएगा कि किसानों से लैंड पूलिंग के जरिये भूमि ले सके। प्राधिकरण की टीम किसानों से संपर्क कर उन्हें लैंड पूलिंग के फायदे बताएगी।''

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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