सड़क हादसे के आरोपी का बरी होना क्लीनचिट नहीं, पीड़ित का मुआवजा रद्द नहीं होगा : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क हादसा केस में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि संदेह का लाभ मिलने पर आरोपी का बरी होना उसे क्लीनचिट मिलना नहीं होता, इसलिए पीड़ित का मुआवजा रद्द नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि हर हादसे का कोई चश्मदीद गवाह हो, यह जरूरी नहीं है।

हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में उस धारणा को पलट दिया है, जिसमें माना जाता है कि आरोपी के बरी होने पर आरोपी पक्ष की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा, सड़क दुर्घटना में जख्मी होना व जान गंवाना एक स्पष्ट घटित घटना है। चालक की लापरवाही साबित होना या ना होना गवाहों पर आधारित होता है। आरोपी को संदेह का लाभ मिल सकता है, लेकिन दुर्घटना के शिकार को पहले की जिंदगी नहीं मिल सकती। इसलिए सड़क दुर्घटना में मिले मुआवजे को रद्द नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने सड़क दुर्घटना के मामलों का विस्तृत व्याख्यान करते हुए कहा कि यहां सिर्फ यह देखने की जरूरत है कि दुर्घटना में प्रयुक्त वाहन सही होना चाहिए। आरोपी का बरी होना उसे क्लीनचिट मिलना नहीं होता। बेंच ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर दुर्घटना का कोई चश्मदीद गवाह हो। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ दिया जा सकता है। लेकिन एक दिव्यांग हुए व्यक्ति या जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को पहले जैसा जीवन नहीं लाैटाया जा सकता। इसलिए वाहन मालिक को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए मुआवजा रकम का भुगतान करना होगा। बेंच ने यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है जो 21 वर्ष की उम्र में सड़क दुर्घटना की वजह से दिव्यांग हो गया था। इस समय वह 37 साल का है।
अब देनी होगी मुआवजे की बढ़ी रकम
इस मामले में ट्रक चालक ने याचिका दायर कर कहा कि उसके ट्रक से गुरुग्राम में एक सड़क दुर्घटना का दावा किया गया था। इस मामले में गुरुग्राम कोर्ट ने आरोपी ट्रक चालक को बरी कर दिया है। इसलिए इस दुर्घटना में जख्मी युवक को दिल्ली की एमएसीटी अदालत द्वारा दिया गया 37 लाख रुपये का मुआवजा रद्द कर दिया जाना चाहिए। लेकिन बेंच ने कहा, एम्स के डॉक्टरों ने पीड़ित को 49 फीसदी दिव्यांग पाया।
बेंच ने कहा कि अब इस पीड़ित को 37 की बजाय 53 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। इस पर 9 फीसदी का ब्याज भी दिया है, क्योंकि इस ट्रक का बीमा नहीं हुआ था। इसलिए इस रकम की भरपाई ट्रक मालिक को करनी है।
दुर्घटना के समय 21 साल का था युवक
यह दुर्घटना गुरुग्राम में वर्ष 2006 में हुई थी। उस समय पीड़ित की उम्र 21 वर्ष थी। वह बीकॉम सेकेंड ईयर का छात्र था। इस गंभीर दुर्घटना की वजह से 20 साल से पीड़ित कई तरह की शारीरिक मुश्किलों से गुजर रहा है। बेंच ने माना कि उसकी अब तक 27 सर्जरी हो चुकी हैं। प्रजनन क्षमता भी खत्म हो गई है। बेंच ने कहा कि हमें पीड़ित के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए।


