‘साक्ष्यों की खामी से बरी होना…’; दिल्ली हाईकोर्ट ने युवक को दिल्ली पुलिस में भर्ती से रोका

Mar 11, 2026 07:07 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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 दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अदालत से बाइज्जत बरी होना व परिस्थितियों के कारण साक्ष्यों की कमी से बरी होने में अंतर है। इसलिए साक्ष्यों की खामी के कारण बरी होने को निरपराध नहीं माना जा सकता।

‘साक्ष्यों की खामी से बरी होना…’; दिल्ली हाईकोर्ट ने युवक को दिल्ली पुलिस में भर्ती से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसे शख्स को दिल्ली पुलिस फोर्स का हिस्सा बनने से रोके जाने को सही माना है, जिस पर गंभीर अपराधिक मुकदमा दर्ज हो चुका है। हालांकि, यह शख्स सबूतों के अभाव में इस मामले से बरी हो गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अदालत से बाइज्जत बरी होना व परिस्थितियों के कारण साक्ष्यों की कमी से बरी होने में अंतर है। इसलिए साक्ष्यों की खामी के कारण बरी होने को निरपराध नहीं माना जा सकता।

'साक्ष्य या गवाह न मिलने पर ही किसी को निर्दोष मानते हैं'

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल व जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने युवक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह दिल्ली पुलिस जैसी अनुशासनात्मक फोर्स का हिस्सा बनने के लायक नहीं है। वह एक गंभीर अपराध के मामले में आरोपी रहा है। बेंच ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि अदालत से बरी होना ही काफी नहीं होता। किसी व्यक्ति को निर्दोष तब माना जाता है जब उसके खिलाफ कोई साक्ष्य या गवाह ही ना मिले, लेकिन जहां गवाह अपने बयानों से मुकर जाएं अथवा आरोपी व गवाहों के बीच समझौता होने की वजह से आरोपी बरी हो जाए, तो उसे निर्दोष नहीं माना जा सकता। बेंच ने इस युवक की दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल पद पर नियुक्ति पर रोक को उचित माना है।

चरित्र सत्यापन में सामने आया आपराधिक रिकॉर्ड

हाईकोर्ट में पेश मामले के मुताबिक, याचिकाकर्ता युवक के पिता दिल्ली पुलिस में तैनात थे। उनकी वर्ष 2013 में मृत्यु हो गई थी। याचिकाकर्ता का नाम साल 2014 में दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल (लिपिक वर्ग) के पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए मंजूर किया गया था। इस बीच इस युवक के चरित्र व पिछली जानकारी के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई। चरित्र सत्यापन के दौरान यह पता चला कि याचिकाकर्ता पर अलग-अलग प्रावधान के तहत एफआईआर नंबर 138/2009 के जरिये आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

गवाहों के मुकरने पर वर्ष 2011 में बरी हुआ था

दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल पद पर नियुक्ति की तमाम प्रक्रियाएं पूरी कर चुके युवक के चरित्र सत्यापन के दौरान उसके खिलाफ पूर्व में गंभीर अपराध का मामला सामने आया। हालांकि, इस मामले में वह वर्ष 2011 में ही बरी हो चुका था। संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा उसके मुकदमे की फाइल देखने के बाद पता चला कि उसके बरी होने का कारण चश्मदीद गवाहों मुकरना रहा। साथ ही पीड़ित पक्ष से समझौता भी सामने आया। इसके बाद अदालत ने बदली परिस्थितियों के मद्देजनर मजबूरी में बरी किया।

Praveen Sharma

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Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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