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दिल्ली में खुलेआम बिक रहा तेजाब, 10 साल बाद भी बस कागजी हैं कानून; खतरे में कई जिंदगियां!

दिल्ली में खुलेआम बिक रहा तेजाब, 10 साल बाद भी बस कागजी हैं कानून; खतरे में कई जिंदगियां!

संक्षेप:

दिल्ली में 2015 के सख्त नियमों के बावजूद, एक पड़ताल में खुलासा हुआ है कि तेजाब बिना किसी पहचान और उद्देश्य के खुलेआम बेचा जा रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

Sep 12, 2025 10:55 am ISTAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में तेजाब की बिक्री को कंट्रोल करने के लिए 2015 में बनाए गए कड़े नियमों को दस साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी राजधानी में यह खतरनाक कैमिकल आसानी से मिल रहा है। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तेजाब न सिर्फ खुले में बिक रहा है, बल्कि इसे खरीदने के लिए न तो कोई आईडी दिखाने की जरूरत पड़ती है, न ही खरीदने का कारण बताना पड़ता है। कई बार तो बोतल पर लेबल तक नहीं होता, जो 2013 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और दिल्ली सरकार के नियमों का खुला उल्लंघन है।

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश और कागजी नियम

2013 में एसिड अटैक की दिल दहला देने वाली घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नाइट्रिक, फॉस्फोरिक, सल्फ्यूरिक और हाइड्रोक्लोरिक जैसे एसिड की बिक्री पर देशव्यापी पाबंदी लगाई थी। कोर्ट ने विक्रेताओं के लिए सख्त नियम बनाए। इसमें लाइसेंस लेना अनिवार्य, खरीदारों का रजिस्टर रखना, पहचान पत्र की जांच और खरीद का उद्देश्य पूछना शामिल है। दिल्ली सरकार ने भी 2015 में 40 ऐसे कैमिकल को विशेष कानून के तहत सूचीबद्ध कर बिक्री पर और कड़ाई की। सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मी बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशानिर्देशों में साफ कहा गया कि 18 साल से कम उम्र वालों को एसिड नहीं बेचा जा सकता और स्टॉक की जानकारी 15 दिनों के भीतर स्थानीय उप-मंडल मजिस्ट्रेट को देनी होगी। उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और माल जब्त हो सकता है। लेकिन हकीकत इन नियमों की खिल्ली उड़ाती है।

सड़कों पर तेजाब की खुली बिक्री

हिंदुस्तान टाइम्स की टीम ने दिल्ली के शानदार बाजारों से लेकर भीड़भाड़ वाली बस्तियों तक आठ इलाकों का दौरा किया और हर जगह तेजाब आसानी से खरीद लिया। न कहीं पहचान मांगी गई, न ही उद्देश्य पूछा गया। दक्षिण-पूर्व दिल्ली में, जहां तेजाब हमले की शिकार महिलाओं का आश्रय गृह है, वहां से चंद कदमों की दूरी पर एक दुकानदार ने 40 रुपये में तेजाब की बोतल थमा दी। न कोई सवाल ना ही कोई चेतावनी।

गोविंदपुरी की गली नंबर 15 के हलचल भरे बाजार में, एक छोटी-सी पेंट और हार्डवेयर की दुकान ने 'मजबूत फ्लोर क्लीनर' के नाम पर पीले रंग का अनलेबल्ड तरल दो मिनट में बेच दिया। कीमत? बस 50 रुपये प्रति बोतल। दुकानदार ने बेझिझक पूछा, 'तेजाब चाहिए?'और प्लास्टिक की बोतल में कैमिकल डालकर थमा दिया।

जंगपुरा में भी यही कहानी देखने को मिली। एक दुकानदार ने मुस्कुराते हुए बोतल दी और कहा, 'ये सबसे अच्छा फ्लोर क्लीनर है, बस जरा तीखा है।' बोतल पर कोई लेबल नहीं था। साकेत के पॉश के-ब्लॉक में भी दो दुकानों ने प्री-ऑर्डर पर तेजाब बेचने की बात कबूल की। एक ने कहा, 'लोग बाथरूम साफ करने के लिए दो-चार बोतल लेते हैं।' दूसरा दुकानदार 80 रुपये की भूरी कांच की बोतल बेचते हुए बोला, 'कानून की वजह से अब मुश्किल है, लेकिन ये लीक नहीं करता।'

किराना दुकानों से लेकर ऑनलाइन तक

सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया (एसडीए) के चहल-पहल भरे बाज़ार में एक किराना दुकानदार ने पीछे के कमरे से तेजाब की बोतल निकाली और एक बड़े ई-कॉमर्स डिलीवरी बैग में डाल दी। उसने कहा, 'ये तो बस हाइड्रोक्लोरिक एसिड है।' मयूर विहार फेज-1 में एक छोटी रसायन की दुकान में 10 अनलेबल्ड बोतलें थीं और दुकानदार ने बड़े ऑर्डर के लिए नाम और नंबर मांगा। यूसुफ सराय में, जहां दर्जनों सैनिटरी और हार्डवेयर की दुकानें हैं, एक युवा दुकानदार ने 50 रुपये में सीलबंद प्लास्टिक की बोतल बेची। उसका कहना था, 'प्लंबर और पेंटर हमारे रेगुलर ग्राहक हैं।'

यहां तक कि ग्रेटर कैलाश जैसे रईस इलाके भी अछूते नहीं। जमरूदपुर गांव में एक जनरल स्टोर ने 50 रुपये में पॉलीथिन बैग में लपेटकर तेजाब की बोतल दे दी। दुकानदार ने बेपरवाही से कहा, 'जीके में सब हमसे लेते हैं।'

ऑनलाइन बाजार भी कम खतरनाक नहीं है। पूर्वी दिल्ली के एक थोक विक्रेता ने नाम और खरीद का कारण पूछा, लेकिन मुंबई के एक विक्रेता ने बिना किसी सवाल के नाइट्रिक एसिड की 'बल्क' डिलीवरी की पेशकश की। व्हाट्सएप पर ऑर्डर की पुष्टि करने वाले भी मिले।

पीड़ितों की अनसुनी पुकार

2020 से 2025 तक, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में कम से कम 35 तेजाब हमले दर्ज किए गए। पीड़ित और कार्यकर्ता कहते हैं कि यह संख्या वास्तविकता से कम है। एसिड की शिकार और ब्रेव सोल फाउंडेशन की संस्थापक शाहीन मलिक ने पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तेजाब की खुली बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। जुलाई 2023 के फैसले में कोर्ट ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध 'वास्तविक उपयोगकर्ताओं और व्यवसायों' को नुकसान पहुंचाएगा, और दिल्ली सरकार को मौजूदा नियमों को बेहतर लागू करने की सलाह दी।

पुलिस की कार्रवाई: कितनी हकीकत, कितना दिखावा?

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अवैध तेजाब बिक्री की सूचना पर समय-समय पर छापेमारी होती है। एक अधिकारी ने बताया, 'हमें सूचना मिलती है, तो हम एसडीएम और नागरिक एजेंसियों को सूचित करते हैं। छापे मारते हैं, लाइसेंस चेक करते हैं, और उल्लंघन करने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगता है।' लेकिन हमारी पड़ताल में 10 में से किसी भी स्थान पर लागूकरण का कोई निशान नहीं दिखा। न रजिस्टर मिले, न अवैध बिक्री के खिलाफ चेतावनी के बोर्ड।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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