आरोपियों को चुनकर गिरफ्तार नहीं कर सकते; पुलिस पर क्यों भड़का दिल्ली HC
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कुछ आरोपियों को चुनकर गिरफ्तार करने की नीति को मंजूरी नहीं दी जा सकती। पुलिस साफ-साफ बताए कि उसका किसी अन्य आरोपी को गिरफ्तार करने का इरादा है या नहीं।

हेमलता कौशिक
दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों की तस्करी के मामले में आरोपियों को चुनकर गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की कड़ी आलोचना की है। हाई कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के चुनकर गिरफ्तार करने के तरीके को मंजूरी नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने मामले में पुलिस की जांच करने वालों की भूमिका को भी बहुत खराब बताया। हाई कोर्ट ने यह देखते हुए कि कथित तौर पर तस्करी की गई बच्ची को आज तक न तो बरामद किया गया है और न ही बचाया गया है।
जस्टिस गिरीश कथपालिया की पीठ ने यह बात नांगलोई पुलिस स्टेशन में बाल तस्करी और किशोर न्याय बोर्ड की धारा 81 के तहत दर्ज एफआईआर में एक आरोपी की नियमित जमानत अर्जी खारिज करते हुए कही। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी राजकुमार और सह-आरोपी गायत्री ने कथित तौर पर खुद को पति-पत्नी बताया और एक बच्ची को गोद ले लिया। इसके बाद बच्ची को कथित तौर पर सह-आरोपी दीपिका को बेच दिया गया, जिसने बदले में कथित तौर पर बच्चे को आगे बेच दिया।
'आरोपियों को चुनकर गिरफ्तार नहीं कर सकते'
पीठ ने इस बात पर खास एतराज जताया कि एक और आरोपी डॉ. कुलविंदर कौर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। जब पीठ ने जांच अधिकारी से उसके स्टेटस के बारे में पूछा, तो पाया कि पुलिस ने उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इस पर पीठ ने कहा कि पुलिस की कुछ आरोपियों को चुनकर गिरफ्तार करने की नीति को मंजूरी नहीं दी जा सकती। पीठ ने यह भी कहा कि पुलिस साफ-साफ बताए कि उसका किसी अन्य आरोपी को गिरफ्तार करने का इरादा है या नहीं। पीठ ने इस आदेश की एक कॉपी संबंधित जिले के पुलिस उपायुक्त को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि वह मामले की आगे की जांच पर निगरानी रख सकें और जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों पर नजर रख सकें।
हालांकि इसके बाद पुलिस ने पीठ को बताया कि कुलविंदर कौर की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। बच्ची की बरामदी के लिए पुलिस उपायुक्त को कहा गया है। इसकी स्टेट्स रिपोर्ट चार सप्ताह में तलब की गई है।


