नए मिशन पर अभिजीत दिपके, जिस राज्य में हुई 30 बच्चों की मौत, वहां के लिए निकले; बोले- हमेशा BJP शासित राज्य ही क्यों...

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इसे सरकार की पूर्ण विफलता बताते हुए उन्होंने सीएम से इसका समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था, 'ये सरकार की पूर्ण विफलता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसका समाधान करें और क्षेत्र में तत्काल जांच, इलाज और राहत उपलब्ध कराएं।

Abhijeet Dipke
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और दोनों सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका (दाएं)।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीते तीन महीनों में हुई 30 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले ने सबको हिलाकर रख दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार घातक बीमारी के साथ ही पीने के पानी, कुपोषण और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की जान जा रही है। जिसके बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके इस मुद्दे को उठाने के लिए मध्य प्रदेश के इसी बालाघाट जिले में आ रहे हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने शुक्रवार की रात को सोशल मीडिया के जरिए दी। इस दौरान उन्होंने MP पुलिस पर उन आदिवासी छात्रों को हिरासत में लेने का आरोप भी लगाया। जो कि उनके दौरे का इंतजाम कर रहे थे।

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'मैं मध्य प्रदेश के बालाघाट जा रहा हूं, जहां 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई है। मुझे एक आदिवासी एक्टिविस्ट से जानकारी मिली है कि MP पुलिस अब उन आदिवासी छात्रों को हिरासत में लेने की कोशिश कर रही है जो मेरे दौरे का इंतजाम कर रहे हैं।'

दिपके ने पूछा- हमेशा भाजपा शासित राज्य ही क्यों?

अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, 'ऐसा क्यों है कि हमेशा भाजपा-शासित राज्य ही सच सामने आने से इतना डरते हैं?' दिपके की इसी पोस्ट को शेयर करते हुए पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने लिखा, 'दिपके एंड कंपनी भाजपा के इन गुंडों का घमंड तोड़ेगी। अगर वे बातचीत नहीं कर सकते, तो यह उनकी समस्या है, हमारी नहीं।'

राहुल गांधी भी उठा चुके आदिवासी बच्चों की मौत का मुद्दा

बता दें कि अभिजीत दिपके बालाघाट इसलिए जा रहे हैं कि बीते तीन महीनों के दौरान वहां पर लगभग तीस आदिवासी बच्चे अलग-अलग कारणों से दम तोड़ चुके हैं। इस मुद्दे को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सोशल मीडिया के जरिए उठा चुके हैं। 5 सितंबर को शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था, 'मध्य प्रदेश के बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मृत्यु की खबर बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। इस घातक बीमारी के साथ पीने के पानी, पोषण, और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की जान ले रहा है।'

राहुल ने इसे बताया था सरकार की विफलता

इसे सरकार की पूर्ण विफलता बताते हुए उन्होंने सीएम से इसका समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था, 'ये सरकार की पूर्ण विफलता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसका समाधान करें और क्षेत्र में तत्काल जांच, इलाज और राहत उपलब्ध कराएं। बच्चों की जिंदगी से समझौता नहीं हो सकता।' इसके साथ ही गांधी ने एक अखबार की खबर की कतरन भी पोस्ट की थी जिसमें बालाघाट क्षेत्र में आदिवासी बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाये गए थे।

MP हाई कोर्ट में आ चुकी जनहित याचिका

उधर इसी मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार के स्वास्थ विभाग, महिला एव बाल विकास विभाग और बालाघाट के जिलाधिकारी कलेक्टर सहित सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

'बच्चों को अबतक पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा'

यह जनहित याचिका नरसिंहपुर जिले के निवासी अंशुल तिवारी ने विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकशित खबरों के आधार पर दायर की है। उन्होंने बताया कि बालाघाट में संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। याचिका में कहा गया था कि बच्चों को अबतक पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है और 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है।

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: सौरभ जैन भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक हिस्सा हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट सेक्शन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग तीन सालों से यहां कार्यरत हैं। सौरभ का करियर टीवी मीडिया से शुरू होकर डिजिटल मीडिया की गतिशीलता तक फैला हुआ है, जो उन्हें खबरों को गहराई और सटीकता के साथ प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कार्य अनुभव

सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।

सौरभ जैन का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी सही तथ्यों व आसान भाषा में पाठकों तक खबरें पहुंचाना है। इस काम में तेजी जितनी जरूरी है, सटीकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिर चाहे वह आम जीवन की खबरें हों, राजनीति की खबरें हों, खेल की खबरें हों या फिर चकाचौंध से भरे बॉलीवुड की खबरें हों। कोई भी खबर सही तथ्यों के साथ रीडर्स तक पहुंचनी चाहिए। हड़बड़ी में तथ्यों की पुष्टि ना होने पर गलत जानकारी पाठकों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसलिए सौरभ का मानना है कि पत्रकारिता का मतलब केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना ही नहीं, बल्कि सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाते हुए उनकी बुद्धिमत्ता और विवेक को भी जागृत करना होता है।

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