बेटे की चिंता तो है लेकिन...; हिंसक झड़पों के बाद क्या बोले दीपके के माता-पिता
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता का रिएक्शन आया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्हें अपने बेटे की चिंता तो है, लेकिन वे उसे पीछे हटने के लिए नहीं कहेंगे।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान दीपके ने जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्हें अपने बेटे की चिंता तो है, लेकिन वे उसे पीछे हटने के लिए नहीं कहेंगे। छत्रपति संभाजी नगर जिले से फोन पर एचटी से बात करते हुए दीपके के पिता ने कहा कि उसने यह विरोध-प्रदर्शन खुद शुरू किया था। इस स्टेज पर हम उससे आंदोलन वापस लेने के लिए नहीं कह सकते। वहीं, मां अनीता ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की।
दीपके की मां ने सवाल उठाया कि 18 से 20 साल के छात्रों के साथ आतंकवादियों जैसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं और पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण ढंग से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी चिंताओं पर ध्यान देने के बजाय, उन पर लाठीचार्ज किया गया। सरकार को उनकी मांगें सुननी चाहिए थीं और कोई फैसला लेना चाहिए था। अनीता ने कहा कि मैंने अपने मोबाइल फोन पर वीडियो देखे और मेरी आंखों में आंसू आ गए। इन छात्रों के साथ जो हुआ, वह बहुत दुखद था।
लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े
बता दें कि सोमवार सुबह संसद की ओर कूच कर रहे भारी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। यह भीड़ जंतर-मंतर पर 23 दिनों से चल रही भूख हड़ताल के बाद संसद तक मार्च करने की कोशिश कर रही थी। ये लोग बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
'सरकार अहंकारी हो गई है'
दीपके के पिता ने कहा कि सोमवार को विरोध-प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई सरकार के अहंकार को दिखाती है। कल जो हुआ वह बहुत परेशान करने वाला था। विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों को पहले कभी पुलिस लाठीचार्ज का सामना नहीं करना पड़ा। ये सभी पढ़े-लिखे छात्र हैं, जिन्होंने हिंसा या दंगे का सहारा नहीं लिया। उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था। उन्होंने कहा कि सरकार अहंकारी हो गई है और उसे लगता है कि उसे कोई हरा नहीं सकता। जब कोई सरकार बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहती है तो ऐसा ही होता है।
अधिकारियों पर हिंसा भड़काने का आरोप
महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के रिटायर्ड इंजीनियर और अभिजीत के पिता ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पुलिस लाठीचार्ज करेगी, क्योंकि यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। उन्होंने अधिकारियों पर हिंसा भड़काने का आरोप भी लगाया। कहा कि ये छात्र पढ़े-लिखे और जिम्मेदार हैं। वे कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाला कोई काम नहीं करते। वहां जो भी हुआ वह सरकार द्वारा प्रायोजित दंगा जैसा लग रहा था।
118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
उधर, दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सीजेपी के संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक हो गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने यह भी बताया कि इन प्रदर्शनों में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए।
जानबूझकर निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया
पुलिस ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक व्यवहार किया। पुलिस की बार-बार दी गई चेतावनियों और कानूनी निर्देशों के बावजूद वे वहां से हटने को तैयार नहीं हुए और जानबूझकर निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
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