अमेरिका जाने से ज्यादा वहां से लौटने की खबर सुनकर रो रही थीं मेरी मांः अभिजीत दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनकी मां अमेरिका से उनके लौटने पर परेशान थीं और रो रही थीं। उन्हें डर था कि भारत पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। दीपके ने कहा कि यह सिर्फ मेरी मां का डर नहीं है, बल्कि राजनीति पर बात करने वाले किसी भी युवा के माता-पिता का डर है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कई एंट्रेंस और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए किया गया था। प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रदर्शनकारी डरे हुए नहीं हैं।
दीपके ने कहा कि उनके अमेरिका जाने के समय की तुलना में उनके लौटने पर उनकी मां ज्यादा परेशान थीं और रो रही थीं। उन्हें डर था कि भारत पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। दीपके ने पहले भी यह आशंका जताई थी कि सीजेपी शुरू करने के बाद अगर वह भारत आए तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों से बात करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि देश का युवा डरा हुआ नहीं है।
यह सिर्फ मेरी मां का डर नहीं
दीपके ने कहा कि यह सिर्फ मेरी मां का डर नहीं है, बल्कि राजनीति पर बात करने वाले किसी भी युवा के माता-पिता का डर है। हम कब तक डर में जिएंगे? उन्हें बता दो कि हम डरते नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने से ठीक पहले उन्हें ऐसा लगा मानो ये आजादी के आखिरी कुछ पल हों। उन्होंने कहा कि मैं इस मकसद के लिए अपनी आजादी कुर्बान करने को पूरी तरह तैयार था। हालांकि, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया और दिल्ली पुलिस ने उन्हें विरोध-प्रदर्शन करने की इजाजत भी दे दी।
युवा कठपुतली नहींः भाजपा अध्यक्ष
उधर, सीजेपी का सीधे तौर पर ज़िक्र किए बिना भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस आंदोलन और दीपके पर परोक्ष रूप से तंज कसा। उन्होंने कहा कि भारत के युवा किसी की कठपुतली नहीं हैं। रांची में शनिवार को नवीन ने कहा कि विदेशों में बैठे कुछ लोग यह मान लेते हैं कि वे भारत के युवाओं को निर्देश दे सकते हैं।
युवा सकारात्मक राजनीति ही चुनेंगे
उन्होंने कहा कि आज के युवा राष्ट्र-निर्माण की दिशा में काम करना और अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं। लेकिन, कुछ ताकतें देश के युवाओं को व्यवस्था-विरोधी बनाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने उन लोगों को भी चेतावनी दी जो भारतीय युवाओं को नकारात्मक राजनीति की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। कहा कि युवा केवल सकारात्मक राजनीति ही चुनेंगे।
विरोध करने का अधिकार है, लेकिन…
नबीन ने यह भी कहा कि हालांकि लोगों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन यह लोकतांत्रिक नियमों के दायरे में ही किया जाना चाहिए। बीजेपी प्रमुख ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों में हमने जो सरकार विरोधी अभियान देखे हैं, वे कभी भी देश के उन युवाओं के लिए नहीं हो सकते जो राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासित ढंग से काम करेंगे।
...तो देश भर में फैल जाएगा आंदोलन
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि हम सरकार को सात दिन का समय दे रहे हैं। या तो धर्मेंद्र प्रधान सम्मानपूर्वक इस्तीफा दें या प्रधानमंत्री उन्हें पद से हटा दें। अगर सात दिनों के भीतर उनका इस्तीफा नहीं आता है तो यह आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा। उन्होंने कहा कि अब हमारी शिक्षा व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने का समय आ गया है। हमने आज इसकी शुरुआत कर दी है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


