अब्दुल रहमान हत्याकांड : 3 ‘खूंखार’ कैदियों को एक सेल में रखने से फरीदाबाद जेल प्रशासन पर उठे सवाल
राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोपी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हुई हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जेल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। गंभीर मामलों के तीन कैदियों को एक ही सेल में रखने के निर्णय पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोपी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हुई हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जेल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। गंभीर मामलों के तीन कैदियों को एक ही सेल में रखने के निर्णय पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी नुकीले पत्थर से वार करता रहा और बैरक में बंद तीसरा कैदी शोर मचाता रहा, उसके बाद सुरक्षा कर्मी सेल तक पहुंचे, लेकिन तब तक अब्दुल रहमान की मौत हो चुकी थी। उसे जेल के अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसके बाद शव को बीके अस्पताल भेज दिया है। मंगलवार को बोर्ड से शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही एसीजेएम संचिता मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू की। पुलिस के डीसीपी सेंट्रल ऊषा कुंडू,एसीपी क्राइम वरूण दहिया, एसीपी अशोक कुमार सहित क्राइम ब्रांच की टीम व एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल का दौरा किया।
अब्दुल रहमान की हत्या के आरोपी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट को जम्मू-कश्मीर की जेल से अक्टूबर 2024 को नीमका जेल लाया गया था। जम्मू में उसके खिलाफ हत्या सहित कई मुकदमे दर्ज हैं। यहां 20 दिन पहले अब्दुल रहमान और उसे एक ही सेल में कर दिया गया। इनके साथ तीसरा कैदी सुहेब रियाज था। जेल में बंद अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट नाम के कैदी ने अब्दुल रहमान पर पत्थर से हमला किया और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।
एटीएस, आईबी की मदद से पकड़ा गया था अब्दुल
अब्दुल रहमान को पाली से हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स फरीदाबाद ने 2 मार्च को गुजरात एटीएस और केंद्रीय एजेंसी की मदद से पकड़ा था। अब्दुल की गिरफ्तारी के समय जांच एजेंसियों को उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड मिले थे, जिनको बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया था।
अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था अरुण
जेल में अब्दुल रहमान की हत्या करने वाला अरुण चौधरी जम्मू जिले के आरएस पुरा सेक्टर के गांव खौर देओनियन का निवासी है। उसका नाम दिसंबर 2023 में हुए सांबा निवासी अक्षय शर्मा हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था। वर्ष 2023 में पंजाब में हुई मुठभेड़ के बाद अरुण चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद अरुण को कठुआ जेल में रखा गया था। अक्टूबर 2024 को नीमका में ट्रांसफर किया गया था। वहीं, कठुआ जेल से ट्रांसफर हुए श्योब रियाज को भी इसी अति विशेष सुरक्षा सेल में रखा गया था।
हरियाणा के डीजीपी जेल आलोक मित्तल ने बताया कि जेल में हत्या का कारण पुलिस और न्यायिक जांच में सामने आएगा। न्यायिक जांच शुरू हो गई है। वैज्ञानिक पहलुओं से जांच के लिए कहा गया है।
जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया का पालन नहीं
तीन गंभीर मामले के तीन कैदियों को एक ही सेल में रखने के निर्णय पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-रिस्क या संवेदनशील मामलों में बंद आरोपियों को अलग-अलग निगरानी श्रेणी में रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की हिंसक घटना को रोका जा सके, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।
आखिर सेल में पत्थर कहां से आया
नीमका जेल के हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद संदिग्ध आतंकी आरोपी की सह-कैदी द्वारा हत्या किए जाने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। घटना रात दो बजे हुई तो ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि कड़ी सुरक्षा वाले वार्ड में पत्थर अंदर कैसे पहुंचा। एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि जेल परिसर में काफी पत्थर पड़े थे।





