जेल में अब्दुल की हत्या मामले में ऐक्शन, सुपरिंटेंडेंट और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ सिक्योरिटी सस्पेंड
फरीदाबाद की नीमका जेल में रविवार रात आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के बाद जेल सुपरिटेंडेंट हरेंद्र सिंह और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ सिक्योरिटी सचिन कौशिक को हरियाणा सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। बुधवार को डीजीपी (जेल) आलोक मित्तल ने जेल का दौरा किया था।

फरीदाबाद की नीमका जेल में रविवार रात आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के बाद जेल सुपरिटेंडेंट हरेंद्र सिंह और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ सिक्योरिटी सचिन कौशिक को हरियाणा सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। बुधवार को डीजीपी (जेल) आलोक मित्तल ने जेल का दौरा किया था और जेल स्टाफ और कैदियों से पूछताछ की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी, जिसके बाद आज को सरकार ने दोनों को सस्पेंड कर दिया।
अरुण चौधरी ने पत्थर से मारा था
हाल ही में जेल में उत्तर प्रदेश के निवासी अब्दुल रहमान की नुकीले पत्थर से वार कर हत्या कर दी गई थी। जम्मू के रहने वाले अरुण चौधरी उर्फ अबू जट ने कथित तौर पर राम मंदिर को लेकर हुई बहस के बाद वारदात को अंजाम दिया था। अरुण चौधरी को कुछ समय पहले जम्मू‑कश्मीर से नीमका जेल शिफ्ट किया गया था।
हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था अब्दुल
20 साल के अब्दुल रहमान को 2 मार्च 2025 को दो जिंदा हैंड ग्रेनेड के साथ पाली गांव के पास गिरफ्तार किया गया था। उस पर अयोध्या को दहलाने की साजिश रचने का आरोप था। उसके पास से राम मंदिर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों वाले वीडियो भी मिले थे। उसे गुजरात और हरियाणा एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया था।
जेल में हत्या से सुरक्षा पर उठे सवाल
पोस्टमार्टम के बाद 11 फरवरी को अब्दुल रहमान का शव उसके पिता और परिवार वाले सुबह करीब 7 बजे अयोध्या जिले के इनायतनगर थाना इलाके के मजनई गांव लाए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह करीब 8:30 बजे उसे मजनई गांव के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। अब जेल के अंदर उसकी हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद एक हाई-प्रोफाइल आरोपी की जेल के अंदर जान कैसे चली गई।
जेल प्रशासन की भूमिका जांच के दायरे में
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां एक्टिव हो गई और जेल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। मृतक के पिता ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा बेल पर रिहा होने वाला था। उन्होंने कहा कि हत्या से ठीक चार दिन पहले अब्दुल रहमान पर हमला करने वाले कैदी को उसी बैरक में शिफ्ट किया गया था।
रिपोर्ट: मोनी देवी
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


