
नेहरू जी, इस्तीफा देना पड़ेगा; गाजीपुर लैंडफिल में आग लगने पर AAP का तंज
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने गाजीपुर लैंडफिल में आग लगने पर भाजपा सरकार पर तंज कसा है। आप नेता ने लिखा है कि नेहरू जी, आपकी MCD ने गाजीपुर लैंडफिल में आग लगा रखी है। अगर आग नहीं बुझी तो शाम तक मेयर के पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने गाजीपुर लैंडफिल में आग लगने पर भाजपा सरकार पर तंज कसा है। आप नेता ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो डाला है, जिसमें लैंडफिल में लगी आग से उठती धुएं को गुबार को दिखाया जा रहा है। इस पर तंज कसते हुए भारद्वाज ने लिखा है कि नेहरू जी, आपकी MCD ने गाजीपुर लैंडफिल में आग लगा रखी है। अगर आग नहीं बुझी तो शाम तक मेयर के पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।
34 सेकेंड के वीडियो में एक आदमी कहता सुनाई दे रहा है कि ये गाजीपुर का कूड़े का पहाड़ है। इसमें आग लगी है। ये पूरा इलाका हमारा मुल्ला कॉलोनी, गाजीपुर, मयूर विहार फेज-3, राजबीर कॉलोनी और खोड़ा तक। ये धुंध नहीं है। ये वो धुआं है जो कूड़े के ढेर की आग से उठ रहा है।
आप नेता का नेहरू जी को लेकर कसा गया तंज यूं ही नहीं आया है। दरअसल, सौरभ भारद्वाज ने नेहरू का नाम लेकर इसलिए कटाक्ष किया क्योंकि भाजपा की सरकारें देश की कई समस्याओं के लिए समय-समय पर पूर्व प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराती रही हैं।
हालांकि, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार लैंडफिल साइट्स को खत्म करने के लिए बायो-माइनिंग और अपशिष्ट-से-ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी लाने पर जोर दे रही है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इन साइट्स को पूरी तरह साफ करके खाली जमीन पर पौधारोपण और शहरी जंगल विकसित करना है।
अगर प्रदूषण की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर में इमरजेंसी जैसी स्थिति है। पिछले कई दिनों से एक्यूआई गंभीर श्रेणी में बना हुआ है। मौजूदा हालात के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं।
दिल्ली में 18 दिसंबर से बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की गाड़ियों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जा रहा है। साथ ही दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-6 गाड़ियों की दिल्ली में एंट्री पर रोक लगा दी गई है। सभी कार्यालयों को 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का आदेश दिया गया है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




