दोबारा होगी परीक्षा, आखिर बदला क्या है? नीट पेपर लीक मामले में AAP का मोदी सरकार से सवाल
आम आदमी पार्टी ने नीट पेपर लीक मामले पर चिंता जताते हुए केंद्र की मोदी सरकार से बड़ा सवाल किया है। पार्टी ने पूछा कि क्या पेपर लीक के पीछे सक्रिय सिंडिकेट को तोड़ने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। परीक्षा दोबारा ली जाएगी। आखिर बदला क्या है? क्या मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है?

आम आदमी पार्टी ने नीट पेपर लीक मामले पर चिंता जताते हुए केंद्र की मोदी सरकार से बड़ा सवाल किया है। पार्टी ने पूछा कि क्या पेपर लीक के पीछे सक्रिय सिंडिकेट को तोड़ने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। परीक्षा दोबारा ली जाएगी। आखिर बदला क्या है? क्या मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है?
छात्रों की जिंदगी के साथ खिलवाड़
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने शुक्रवार को नीट (यूजी)- 2026 पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार से पूछा कि क्या पेपर लीक के पीछे सक्रिय सिंडिकेट को तोड़ने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर परीक्षा में शामिल हुए 22-23 लाख छात्रों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। एएनआई से बातचीत में आप नेता ने कहा कि जिस तरह से मोदी सरकार नीट परीक्षा को हैंडल कर रही है, उससे युवाओं के मन में और भी ज्यादा शक पैदा हो रहा है। पूरे देश में लाखों युवा घबराए हुए हैं। परीक्षा अचानक रद्द कर दी गई। कहा गया कि दोबारा परीक्षा ली जाएगी। एक तारीख भी घोषित की गई है। आखिर बदला क्या है? क्या मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है?
निचले स्तर के कुछ लोग ही गिरफ्तार
ढांडा ने पूछा कि क्या राजनीतिक संरक्षण पाने वाले बड़े लोग जो हर साल पेपर लीक करवाते हैं, जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे? निचले स्तर के कुछ लोगों को ही गिरफ्तार किया गया। आप नेता ने कहा कि एनटीए एक महीने बाद दोबारा परीक्षा लेगा। इसकी क्या गारंटी है कि इस बार फिर से पेपर बिकने के लिए उपलब्ध नहीं होंगे?
21 जून को दोबारा परीक्षा
इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगले साल से यह परीक्षा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड में आयोजित की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि वे परीक्षा में दोबारा किसी भी तरह की धांधली नहीं होने देंगे। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता छात्रों का भविष्य है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता छात्रों का भविष्य है। सरकार उनकी कड़ी मेहनत और प्रयासों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। इस बार हम किसी भी तरह की धांधली नहीं होने देंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। राष्ट्रहित में परीक्षा रद्द करने का कठिन फैसला लिया गया।
'गेस पेपर्स' की आड़ में लीक हुए पेपर
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि 'गेस पेपर्स' की आड़ में परीक्षा के प्रश्न-पत्र बाहर लीक हो गए थे। उन्होंने बताया कि सत्यापन की प्रक्रिया 8 मई को शुरू हुई थी और 11 मई तक चली। इसके बाद 12 मई को केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। मंत्री ने कहा कि जब पूरी बात साफ हो गई और यह पक्का हो गया कि इस बार लीक हुए पेपर के आधार पर ही सवाल पूछे गए थे तो 12 मई को छात्रों के हित में एक फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि शिक्षा माफियाओं की साजिश की वजह से कोई भी काबिल उम्मीदवार अपने अधिकारों से वंचित रह जाए।
14 जून तक एडमिट कार्ड जारी होंगे
शिक्षा मंत्री ने कुछ सुधारों की भी घोषणा की, जिनमें छात्रों द्वारा जमा की गई फीस वापस करना और आने वाली परीक्षा के लिए फीस माफ करना शामिल है। प्रधान ने कहा कि हम छात्रों की फीस वापस करेंगे। आने वाली परीक्षा के लिए कोई फीस नहीं लगेगी। उन्होंने अगले साल से नीट परीक्षा सीबीटी मोड में आयोजित कराने की घोषणा की। प्रधान ने कहा कि परीक्षा के लिए सभी उम्मीदवारों को 14 जून तक एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


