लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर उनकी पूजा करें, PM ऑफिस का नाम सेवा तीर्थ करने पर AAP नेता का तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर उन्होंने बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। आप सांसद ने कहा कि पिछले 12 साल में देश की जनता को ना महंगाई से राहत मिली और ना ही युवाओं को रोजगार मिला है। मोदी जी सिर्फ इमारतें बनवा रहे हैं, लेकिन उन इमारतों में कोई काम नहीं हो रहा है।
वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे
आप नेता ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि सेवा तीर्थ का मतलब है कि वे भगवान का अवतार हैं, आम इंसान तो हैं नहीं। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे। काम-धाम तो कुछ होना नहीं है। 12 साल हो गया ना 24 करोड़ रोजगार मिला नौजवानों को, ना काला धन आया, ना 15 लाख मिला और ना 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिला।
आप सांसद ने कहा कि मोदी जी किस प्रकार से देश की सेवा कर रहे हैं, यह एक बड़ा सवालिया निशान है। बाकी वो अपने आप को अवतार मानते हैं। नॉन बाइलॉजिकल हैं। जहां वो बैठेंगे वह तीर्थ स्थान ही माना जाएगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो समझता हूं कि लोग नारियल लेकर जाएं उनके पास।
12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं
सारे मंत्रालयों के लिए एक ही कर्तव्य भवन बनाने के सवाल पर संजय सिंह ने कहा कि कर्तव्य क्या हो रहा है। कर्तव्य भवन बना लीजिए, सेवा तीर्थ बना लीजिए, लोगों से कहिए कि नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं, लेकिन काम क्या हो रहा है। काम तो बताइए। आपने हर साल 2 करोड़ नौकरी देने को कहा था, किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही थी, काला धन आएगा और 15 लाख मिलेगा, आपने कहा था कि 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिलेगा।
आप नेता ने कहा कि काम क्या हो रहा है। सेवा क्या हो रहा है आपके माध्यम से। क्या कर रहे हैं आप। आप पूंजीपतियों की सेवा कर रहे हैं। बड़े-बड़े लोगों को, अंबानी और अडाणी को करोड़ों कमवा रहे हैं। इमारते बनवाने से थोड़े ही न काम होगा। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं है कि काम हो रहा है।
वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं
वंदे मातरम् पर उन्होंने कहा कि इससे उनका लेना-देना क्या है। क्या इनके पुरखों ने कभी वंदे मातरम् गाकर जेल काटी है। क्या अंग्रेजों ने कभी उन पर धारा लगाई है। मैंने आरएसएस के चार लोगों के नाम पूछे थे जो वंदे मातरम् गाकर जेल गए थे, आज तक वे नहीं बता सके। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, एक नई चीज परोसी जा रही है, ताकि लोग पुरानी चीजें भूल जाएं। वंदे मातरम् आप दिनभर गाते रहिए, हमें कोई परेशानी नहीं है।
आप नेता ने सवाल किया कि वंदे मातरम् देश के कितने लोगों को आती है। उन्होंने कहा कि इस देश के 99 प्रतिशत लोगों को पूरा वंदे मातरम् नहीं आती, तो क्या वे देशभक्त नहीं हैं। जो हमारा मजदूर है, रिक्शे वाला है, ऑटो वाला है, क्या वो देशभक्त नहीं है।
ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा
संजय सिंह ने कहा कि भाजपा का एक काला इतिहास है जो देश के लोगों को जानना चाहिए। भाजपा ने नागपुर के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा झंडा नहीं फहराया, जो इनकी मातृ संस्था है आरएसएस। दूसरा इनका काला इतिहास है कि 28 दिसंबर 1949 में पांचजन्य में एक लेख छपा है जिसमें राष्ट्र गान जन-मन-गण को मनोरंजन का एक चीज बताया गया है। तो क्या भाजपा अपने पूर्वजों के इन गुनाहों के लिए देश से माफी मांगेगी। आप नेता ने कहा कि ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा है, जिसे देश की जनता को समझ जाना चाहिए।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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