तभी तो नौजवानों को नफरत की आग में झोंका जाएगा; NEET पेपर लीक मामले में AAP नेता संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने NEET (UG)-2026 के पेपर लीक होने पर केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। आप नेता ने नौजवानों से आह्वान किया है कि वे सरकार से पूछें कि उनके पैसे और दिन-रात की मेहनत पर क्यों पानी फेरा गया।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने NEET (UG)-2026 के पेपर लीक होने पर केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। आप नेता ने नौजवानों से आह्वान किया है कि वे सरकार से पूछें कि उनके पैसे और दिन-रात की मेहनत पर क्यों पानी फेरा गया।
शिक्षा माफियाओं को संरक्षण
आप सांसद ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि नीट की परीक्षा रद होना देशभक्ति है। उन्होंने पीएम मोदी और उनकी पार्टी पर शिक्षा माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया। कहा कि बीजेपी ऐसे लोगों को बचाती है, यह भी देशभक्ति का काम है। जैसे डीजल, पेट्रोल, गैस इस्तेमाल ना करो, यह भी देशभक्ति का काम है। सोना ना खरीदो, यह भी देशभक्ति है। तो पेपर लीक कराओ और नौजवानों का भविष्य खराब करो, यह भी देशभक्ति है।
नौजवान सड़क पर घूमेगा, तभी तो…
आप नेता ने कहा कि बर्बाद होकर नौजवान सड़क पर घूमेगा, तभी तो मोदी जी उनसे लड़ाई, झगड़े और दंगे-फसाद कराएंगे। तभी तो उनको नफरत की आग में झोंका जाएगा। ये सारे के सारे जो शिक्षा माफिया जो देशभर में पेपर लीक कराते हैं, ये किससे जुड़े हुए लोग हैं। आप नेता ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि इन सभी को बीजेपी का संरक्षण प्राप्त है। मैंने संसद के अंदर भी इसका खुलासा किया था।
22 लाख बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया
आप नेता ने कहा कि पेपर लीक करने वाली जो कंपनियां हैं, जिनसे ये परीक्षाएं कराईं जाती हैं, वो सभी बीजेपी से जुड़े हुए हैं। आप नेता ने कहा कि 22 लाख बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया। कौन जिम्मेदार है इसके लिए। उनके माता पिता ने लाखों रुपए खर्च किए अपने बच्चों के उपर। बच्चों ने एक साल तक दिन-रात जमकर पढ़ाई की। आप नेता ने कहा कि यह पहला वाकया नहीं है। पिछले 10-12 सालों में 90 बार पेपर रद हो चुका है और वह भी बीजेपी शासित राज्यों में। इनमें ज्यादातर वे परीक्षाएं हैं, जिन्हें केंद्र सरकार करवाती है।
पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रही
आप नेता ने बीजेपी पर नौजवानों को बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर नौजवान इन बातों को नहीं समझेंगे तो ऐसे ही पेपर लीक होते रहेंगे और बीजेपी शासन करती रहेगी। आप नेता ने कहा कि हिंदू-हिंदू करके बीजेपी नौजवानों की पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रही है। 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था। अभी पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद हुई। यह देश के नौजवानों के साथ बीजेपी का बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने नौजवानों से सरकार से इसका जवाब मांगने को कहा। आप नेता ने कहा कि जिस तरह हिटलर देश की हर बर्बादी को देशभक्ति से जोड़ देता था, वही काम हिन्दुस्तान में हो रहा है। पेट्रोल-डीजल इस्तेमाल ना करो, गैस इस्तेमाल ना करो, सोना ना खरीदो, ये सब देशभक्ति है।
सरकार सिर्फ आंदोलन की भाषा ही समझती हैः केजरीवाल
इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नीट के रद्द होने से प्रभावित छात्रों को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए, क्योंकि सरकार सिर्फ आंदोलन की भाषा ही समझती है। केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होना इस बात की ओर इशारा करता है कि इसमें उच्च स्तर पर मिलीभगत है। केजरीवाल ने कहा कि कई परिवार ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और तैयारी पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। ऐसी परीक्षाओं के लिए कितनी कड़ी मेहनत करते हैं। कोचिंग महंगी होती है। उन्होंने नौजवानों से आंदोलन की अपील की और कहा कि वह उनका साथ देने के लिए हमेशा तैयार हैं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


