उल्लू और उल्लू के पट्ठे; किनके लिए ऐसा कहने लगे दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री, बेहतर शब्दों की तलाश
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने उन लोगों पर भड़ास निकाला, जिन्होंने अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी बंगले को शीश महल पार्ट टू बताया। सिसोदिया ने ऐसे लोगों को उल्लू और उल्लू के पट्ठे कहा। साथ ही कहा कि अगर किसी को मेरे शब्दों पर आपत्ति हो तो मुझे उन लोगों के लिए बेहतर शब्द बताएं।

दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने उन लोगों पर भड़ास निकाला, जिन्होंने अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी बंगले को शीश महल पार्ट टू बताया। सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि कल एक 'उल्लू' ने इंटरनेट से ये तस्वीरें उठाईं और दिखाते हुए कहा कि ये शीश महल है। उल्लू के सभी बच्चों ने एक साथ कहा, हां-हां, ये शीशमहल है।
हालांकि, सिसोदिया ने यह भी लिखा कि अगर किसी को मेरे शब्दों पर आपत्ति हो तो मुझे उन लोगों के लिए 'उल्लू' से बेहतर शब्द बताएं जो Pinterest पर ये तस्वीरें पोस्ट करके दावा करते हैं कि ये मेरे नेता के घर की हैं। और उन लोगों के लिए भी जो सहमति में सिर हिलाते हैं। मैं अपनी भाषा को सुधार लूंगा।
यूजर्स की मिलीजुली प्रतिक्रिया
सिसोदिया के इस पोस्ट पर यूजर्स ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। चेतन सिसोदिया नाम के एक यूजर ने लिखा कि अगर आम आदमी पार्टी में हिम्मत है तो प्रवेश वर्मा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करे, वरना यह मान ले कि अरविंद केजरीवाल भ्रष्ट हैं।
वहीं, एक अन्य यूजर विकास ने लिखा, अरे हां, खासकर प्रवेश वर्मा दिल्ली की सड़कों की बदहाली पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। उन्हें तो बस 'शीश महल' को लेकर यह नौटंकी करनी है। क्या उन्हें उत्तराखंड के सीएम धामी जी नजर नहीं आते, जो इतने आलीशान घर में रहते हैं? पीके सैनी नाम के एक यूजर ने लिखा कि अरे उल्लू के पट्ठे, इसका क्या मतलब है? सीधे-सीधे बोल- अंध-भक्त है या गोबर-भक्त?
नए सरकारी बंगले को शीश महल पार्ट टू बताया
दरअसल, दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी बंगले को शीश महल पार्ट टू बताया था। उन्होंने कहा कि जो नेता पहले सादगी की बात करते थे, वही अब विलासिता का जीवन जी रहे हैं।
बीजेपी नेता ने कहा कि जिसने दिल्ली की जनता के साथ विश्वासघात किया, जो बाबासाहेब अंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें दिखाकर अन्ना हजारे के नाम पर सत्ता में आया, जिसने कहा कि मैं सरकार से आवास और कार नहीं लूंगा, वह दिल्ली का रहमान डकैत है। प्रवेश वर्मा कहा कि आम आदमी पार्टी का नाम बदलकर 'आलीशान आदमी पार्टी' रख देना चाहिए।
आतिशी ने पलटवार किया
प्रवेश वर्मा के आरोपों पर पलटवार करते हुए आप की नेता आतिशी ने कहा कि जारी की गई तस्वीरें पूरी तरह फर्जी हैं। उनका दावा है कि इन तस्वीरों का अरविंद केजरीवाल के नए घर से कोई संबंध नहीं है। आतिशी ने आरोप लगाया कि इन तस्वीरों के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


