AAP ने राज्यसभा सांसदों को जारी किया ‘व्हिप’- 3 दिन सदन में रहना अनिवार्य; क्या होता है ये?
आम आदमी पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसदों के लिए एक अहम ‘व्हिप’ जारी किया है। पार्टी के चीफ व्हिप नारायण दास गुप्ता द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश के मुताबिक, पार्टी के सांसदों को 3 दिन सदन में रहना अनिवार्य होगा।

आम आदमी पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसदों के लिए एक अहम ‘व्हिप’ जारी किया है। पार्टी के चीफ व्हिप नारायण दास गुप्ता द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश के अनुसार, 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक सभी राज्यसभा सांसदों को अनिवार्य रूप से सदन में मौजूद रहना होगा।
11 बजे तक पहुंचे सदन
जारी दस्तावेज के मुताबिक, इन तीन दिनों के दौरान राज्यसभा में “कई महत्वपूर्ण मुद्दों” पर चर्चा और कार्यवाही प्रस्तावित है। ऐसे में पार्टी ने अपने सभी सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे सुबह 11 बजे से सदन में उपस्थित रहें और पार्टी के रुख के अनुसार समर्थन करें।
सामान्य नहीं, ये है सख्त आदेश
व्हिप में साफ तौर पर कहा गया है कि इसे “MOST IMPORTANT” माना जाए। यानी यह कोई सामान्य निर्देश नहीं बल्कि सख्त आदेश है। इसका मतलब है कि पार्टी किसी भी अहम बहस या संभावित वोटिंग के दौरान अपने सांसदों की पूरी मौजूदगी सुनिश्चित करना चाहती है। ये तो बात हुई आदेश के कॉपी की। अब आगे के हिस्से में समझिए आखिर ये व्हिप होता क्या है…
क्या होता है व्हिप
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम तौर पर व्हिप तब जारी किया जाता है, जब संसद में कोई महत्वपूर्ण बिल, प्रस्ताव या बहस होने वाली हो, जहां हर वोट की अहमियत होती है। ऐसे में किसी सांसद की अनुपस्थिति या अलग रुख पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इस व्हिप के जरिए AAP ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में राज्यसभा में कुछ बड़े मुद्दों पर चर्चा या निर्णय हो सकता है। पार्टी अपने सांसदों को पहले से अलर्ट कर रही है ताकि किसी भी स्थिति में संख्या बल और एकजुटता बनाए रखी जा सके।
संविधान में नहीं है व्हिप का जिक्र
आपको जानकर शायद थोड़ी हैरानी हो कि 'व्हिप' का जिक्र संविधान में कहीं भी नहीं है। फिर आप सोच रहे होंगे कि अरे भई ये क्या बात हुई! जब संविधान की किताब में इसका जिक्र नहीं है, तो फिर इसका सदन के कामकाज में कैसे इस्तेमाल हो गया। तो हम आपको समझाते हैं।
संविधान नहीं इस पर है आधारित
इसका उल्लेख संविधान में नहीं है। सदन के नियमों या किसी संसदीय विधि में भी नहीं है। लेकिन यह संसदीय परंपराओं पर आधारित है। इसका मतलब है कि व्हिप कोई नया या अचानक बना नियम नहीं है, बल्कि यह संसद में लंबे समय से चली आ रही परंपरा और नियमों पर आधारित व्यवस्था है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
और पढ़ें

