
पनीर तो 85% मिलावटी, आटे के भी आधे सैंपल फेल; गाजियाबाद में हुईं जांच ने चौंकाया
गाजियाबाद जिले में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट में पनीर के 85.05 प्रतिशत और खोया के 67.86 प्रतिशत नमूने फेल मिले। अनाज और आटे के भी आधे से ज्यादा नमूने रिपोर्ट में फेल हो गए।
गाजियाबाद जिले में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध से बने उत्पाद हो या फिर रोजमर्रा की थाली में शामिल अनाज, हर जगह मिलावट की जा रही। जांच रिपोर्ट में पनीर के 85.05 प्रतिशत और खोया के 67.86 प्रतिशत नमूने फेल मिले। अनाज और आटे के भी आधे से ज्यादा नमूने रिपोर्ट में फेल हो गए।
शहर में त्योहारों के दिनों के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी खाद्य पदार्थों में मिलावट की जा रही है। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की अप्रैल से दिसंबर तक की नौ माह की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार पनीर, खोया और विभिन्न प्रकार के अनाज और उनसे बने आटे के अधिकांश नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
बाजार में बने खाद्य पदार्थों सहित भोजन बनाने वाले पदार्थ जैसे सरसों तेल, रिफाइंड तेल, मसाले, दाल, आटा में भी मिलावट पाई गई। विभाग ने नौ महीने में 105 खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर पनीर के 144 नमूने लिए, इनमें से 107 सेंपल की रिपोर्ट में से 91 नमूने फेल पाए गए। वहीं, खोए के लिए भी 174 खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर 58 नमूने लिए, इनमें से 28 सेंपल की रिपोर्ट में से 19 के नमूने फेल पाए गए। इसी तरह घर में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न प्रकार के अनाज और आटे के 117 नमूने लिए, जिसमें से 104 सेंपल की रिपोर्ट आई है इसमें से 61 नमूने फेल पाए गए।
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग अभियान चलाकर मिलावटखोरों पर नकेल कसता है और मिलावट करने वालों पर कोर्ट में वाद भी दायर करता है। नौ महीनों में एडीएम कोर्ट में विभिन्न लोगों के खिलाफ कुल एक करोड़ 81 लाख 75 हजार रुपये के जुर्माने लगाए गए। इसके बाद भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा।
ऐसे करें असली-नकली घी की पहचान
आधा चम्मच घी या मक्खन पारदर्शी ग्लास में लेकर उसमें दो से तीन बूंद आयोडिन टिंचर डालें। यदि उसका रंग बदल जाए और नीला हो जाए तो यह मिलावट का संकेत है।
खोया और पनीर
पांच मिलीमीटर पानी में खोया या पनीर का दो से तीन मिलीग्राम सैंपल लेकर उसमें मिला दें। पानी ठंडा होने पर उसमें दो से तीन बूंद आयोडिन टिंचर डालें। यदि ग्लास में पानी का रंग बदल कर नीला हो जाए तो मिलावट है।
जांच रिपोर्ट में देरी का लाभ उठा रहे
जनपद में खाद्य प्रयोगशाला नहीं होने के कारण मिलावटखोरों को फायदा मिलता है। विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट सामान्य दिनों में एक से दो महीने में आती है, वहीं त्योहारों के समय पर लिए नमूनों की रिपोर्ट आने में तीन महीने तक का भी समय लगता है। जब तक रिपोर्ट आती है, खाद्य सामग्री दुकानों से लोगों के घरों तक पहुंच जाती है।





