GTB अस्पताल से 7 महीने के बच्चे का अपहरण, पुलिस की कई टीमें तलाश में लगीं
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में रविवार दिनदहाड़े एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां एक शातिर महिला ने सात महीने के मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया। आरोपी महिला पीड़ित परिवार को बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का झांसा देकर अस्पताल लाई थी। माता-पिता को फॉर्म भरने में उलझाकर वह बच्चे को लेकर फरार हो गई।

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में रविवार दिनदहाड़े एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां एक शातिर महिला ने सात महीने के मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया। आरोपी महिला सीलमपुर इलाके में रहने वाले पीड़ित परिवार को बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का झांसा देकर अस्पताल लाई थी। माता-पिता को फॉर्म भरने में उलझाकर वह बच्चे को लेकर फरार हो गई।
फिलहाल बच्चे को बरामद करने के लिए स्पेशल स्टाफ,एएटीएस समेत करीब आधा दर्जन टीमें लगी हुई है। अस्पताल परिसर व आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस के मुताबिक, सीलमपुर निवासी पीड़ित पिता ने बताया कि उनके सात महीने के बेटे का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना था।
घर भी आई थी आरोपी महिला
करीब एक सप्ताह पहले एक अज्ञात महिला ने उनके नंबर पर फोन किया और 1000 रुपये के बदले बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने को कहा। इसके बाद आरोपी महिला कई बार उनके घर भी आई, जिसके बाद परिवार ने उस पर भरोसा कर लिया। रविवार दोपहर 12 बजे आरोपी महिला, पीड़ित महिला और उनके बच्चे को ई-रिक्शा में बैठाकर जीटीबी अस्पताल लेकर पहुंची थ।
फॉर्म भरने में उलझाया और फरार हो गई
अस्पताल पहुंचने के बाद, महिला परिवार को इमारत की पहली मंजिल पर ले गई। उसने पीड़िता को एक फॉर्म थमाया और कहा कि इसे भरकर दूसरी मंजिल पर जमा करना है। इसी दौरान महिला ने बच्चे को अपने पास गोद में ले लिया। जब पीड़िता का ध्यान फॉर्म भरने में लगा था, तभी महिला मौका पाकर बच्चे के साथ वहां से फरार हो गई।
एमडीएमए समेत तीन तस्कर पकड़े
पूर्वी जिले की स्पेशल स्टाफ ने एक ड्रग पेडलिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान प्रवीण कुमार, अभिषेक और लक्ष्य के रूप में हुई है। डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि 26 मई की शाम पुलिस अक्षरधाम सेतु के पास गश्त कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध कार की तलाशी लेने पर 6.2 ग्राम एमडीएमए बरामद हुआ। पुलिस ने कार जब्त कर ली है। प्रवीण पेशे से ड्राइवर है, जबकि अभिषेक और लक्ष्य छात्र हैं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


