53 साल की उम्र में शख्स को मिली सरकारी नौकरी, कैसे हुआ ये कमाल; खुशी के पीछे छुपी है बेहद दुखभरी कहानी

Sourabh Jain एएनआई, नई दिल्ली
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इस मामले में हाई कोर्ट ने 4 मई को जारी अपने आदेश में कहा कि, 'हाई कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर कार्रवाई करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है, साथ ही याचिकाकर्ता को इस बारे में जरूरी जानकारी देने के लिए भी कहा है।'

53 साल की उम्र में शख्स को मिली सरकारी नौकरी, कैसे हुआ ये कमाल; खुशी के पीछे छुपी है बेहद दुखभरी कहानी

हाई कोर्ट के दखल के बाद दिल्ली में 53 साल की उम्र में एक शख्स को सरकारी नौकरी मिल गई है। दरअसल यह कोई कमाल नहीं है, क्योंकि यह शख्स शहर में साल 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों का पीड़ित है और उसके साथ ही एक अन्य शख्स को दंगा पीड़ितों के लिए बनी योजना के तहत सरकारी नौकरी मिली है। इस मामले में याचिकाकर्ता पंकज बख्शी (उम्र 53) ने 5 साल पहले में हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के साल 2006 में जारी आदेश का हवाला देते हुए दंगा पीड़ितों के लिए शुरू की गई योजना के तहत सरकारी नौकरी देने की मांग की थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पंकज बख्शी के पिता, कौशल सिंह की मौत 1 नवंबर 1984 को मंगोलपुरी स्थित उनके घर पर दंगों के दौरान हो गई थी। वहीं दंगों के सदमे और उससे उपजी लंबी बीमारी के कारण दो साल बाद ही 20 जुलाई 1986 को उनकी मां जसपाल कौर का भी देहांत हो गया था। उस समय पीड़ित की आयु करीब 11 साल थी। अपनी याचिका में पीड़ित ने उच्च न्यायालय से नौकरी के साथ-साथ 2006 से लेकर अब तक हुए आय के नुकसान के बदले मुआवजे देने की भी मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने इस बारे में कुछ नहीं कहा।

हाई कोर्ट के दखल के बाद मिली नौकरी

याचिकाकर्ता पंकज बख्शी ने इस बारे में साल 2021 में हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी और इस दौरान उनके वकील ने गृह मंत्रालय के 16 जनवरी 2006 के सर्कुलर का हवाला देते हुए सरकारी नौकरी की मांग की थी। जिसके बाद करीब 5 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद जस्टिस पुरुशेंद्र कौरव ने हाल ही में बताया कि 24 अप्रैल, 2026 के एक पत्र के जरिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (सेंट्रल नॉर्थ) कार्यालय ने 1984 के दो दंगा प्रभावित व्यक्तियों के नाम नौकरी देने के लिए भेजे हैं, जिनमें से एक याचिकाकर्ता पंकज बख्शी हैं।

सिफारिश पर कार्रवाई के लिए छह सप्ताह का समय दिया

अदालत ने बताया कि नौकरी देने की यह सिफारिश रेवेन्यू डिपार्टमेंट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (मुख्यालय)-II को भेजी गई है। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने एक हलफनामा दायर कर हाई कोर्ट को इस सुझाव के बारे में जानकारी दी। इस मामले में हाई कोर्ट ने 4 मई को जारी अपने आदेश में कहा कि, 'हाई कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर कार्रवाई करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है, साथ ही याचिकाकर्ता को इस बारे में जरूरी जानकारी देने के लिए भी कहा है।'

अदालत के एक पुराने आदेश का भी दिया था हवाला

याचिका में पीड़ित के वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के 27 नवंबर, 2019 के दिए उस आदेश का भी जिक्र किया था, जो 'दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट बनाम भारत सरकार' मामले में दिया गया था। अब अदालत ने निर्देश दिया है कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा की गई सिफारिश पर तेजी से अमल किया जाए और इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए।

Sourabh Jain

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सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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