नोएडा में 50 ई-बसें चलाने की तैयारी, जेवर एयरपोर्ट सहित इन 5 रूटों पर दौड़ेंगी
नोएडा में पांच रूट पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। ये बसें जेवर में बने एयरपोर्ट तक भी चलेंगी। इनके लिए रूट फाइनल कर लिए गए हैं। इसको लेकर बुधवार को प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बैठक हुई। प्राधिकरण की तरफ से पांच रूट परिवहन निगम को सौंपे गए।

नोएडा में पांच रूट पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। ये बसें जेवर में बने एयरपोर्ट तक भी चलेंगी। इनके लिए रूट फाइनल कर लिए गए हैं। इसको लेकर बुधवार को प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बैठक हुई। प्राधिकरण की तरफ से पांच रूट परिवहन निगम को सौंपे गए।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि बैठक में यह तय हुआ कि पांच रूट पर 10-10 बसें चलाई जाएं। बसें परिवहन निगम की होंगी और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम संचालन करेगा। इनसे मिलने वाले किराये और खर्च के बीच के अंतर वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) को प्राधिकरण देने के लिए तैयार हो गया है। अब रूट, बस डिपो, बस स्टॉप के लिए गुरुवार को प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम संयुक्त सर्वे करेंगे। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने सिटी बस सेवा के तौर पर इन बसों के संचालन की योजना को आगे बढ़ाया है। सीईओ ने परिवहन आयुक्त से वार्ता कर 50 बसें नोएडा में चलाने की मांग रखी थी। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद संचालन की कार्ययोजना तैयार हो रही है। इस क्रम में बुधवार को प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार सिंह के बीच बैठक हुई।
प्राधिकरण की तरफ से पांच रूट परिवहन निगम को सौंपे गए। निगम की तरफ से बसों के संचालन के लिए डिपो की मांग की गई। इस पर प्राधिकरण ने सेक्टर-90 में नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के बस डिपो का प्रस्ताव दिया। इसके अलावा प्राधिकरण ने 50 बसों के संचालन पर अनुमानित वीजीएफ की गणना कर जानकारी देने के लिए भी क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र सौंप दिया।
ये हैं प्रस्तावित रूट
● नोएडा सेक्टर-90 बस डिपो से बॉटनिकल गार्डन होते हुए जेवर।
● बॉटनिकल गार्डन से ग्रेटर नोएडा में परी चौक तक।
● सेक्टर-90 से बॉटनिकल गार्डन, सेक्टर-71 चौराहा होते हुए ग्रेटर नोएडा वेस्ट।
● सेक्टर-62 मॉडल टाउन से विश्वकर्मा रोड होते हुए सेवन एक्स सेक्टर से सेक्टर-98 और 96 तक।
● डीएससी रोड पर सेक्टर-15 से भंगेल एलिवेटेड से फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र से होते हुए सूरजपुर तक।
100 और बसें चलाने की कवायद
शासन स्तर पर भी जिले के लिए 100 बसों का संचालन कराए जाने की योजना तैयार हुई है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक की अगुवाई में संचालन समिति बनेगी। यह समिति अगले आठ महीने में इन बसों का जरूरत के हिसाब से संचालन करवाएगी। तब तक इन 50 बसों का संचालन करवाया जाएगा। यह 100 बसें आने और उनका संचालन शुरू होने के बाद इन 50 बसों की जरूरत न होने पर हटाया जाएगा। अगर इन बसों के जरिए अच्छा रेस्पांस मिला तो बसें चलती रहेंगी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


