काम की बात: नोएडा में 4 रूट पर 50 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी, किन रूटों पर कितनीं बसें; पूरी लिस्ट
नोएडा में चार रूट पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इनमें किराया यूपी रोडवेज निगम की तरफ से निर्धारित दरों के हिसाब से लिया जाएगा। सेक्टर-90 डिपो में बसों के लिए 20 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। बसों के चलने में तीन-चार महीने का समय लगेगा।

नोएडा में चार रूट पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इनमें किराया यूपी रोडवेज निगम की तरफ से निर्धारित दरों के हिसाब से लिया जाएगा। सेक्टर-90 डिपो में बसों के लिए 20 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। बसों के चलने में तीन-चार महीने का समय लगेगा।
प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि बसों को चलाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ समन्वय कर लिया गया है। इनको सिटी बस के तौर पर चलाया जाएगा। सभी बसों को सेक्टर-90 डिपो से चलाया जाएगा। इनके लिए सेक्टर-90 में बस डिपो, ई-चार्जिंग प्वाइंट, बस सर्विस स्टेशन, ड्राइवर-कंडक्टर वर्कशॉप आदि मुख्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इन बसों का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा अपनी निर्धारित टिकट दरों पर किया जाएगा। बसों के संचालन पर होने वाले वीजीएफ-वायबिलिटी गेप फंड-का भुगतान प्राधिकरण करेगा।
रूट नंबर-1
सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन से गोल्फ कोर्स, सेक्टर-32 सिटी सेंटर, सेक्टर-51 होशियारपुर होते हुए पर्थला चौक और फिर वहां से किसान चौक होते हुए ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक मूर्ति तक।
दूरी: करीब 20 किलोमीटर।
बसों की संख्या- 8
रूट नंबर-2
सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर-12/22 चौराहा से सेक्टर-16 होते हुए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के जरिये परी चौक, जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक।
दूरी: करीब 60 किलोमीटर।
बसों की संख्या- 16
रूट नंबर-3
सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर-32 सिटी सेंटर, सेक्टर-71 चौराहे से बाएं मुड़कर सेक्टर-61 मेट्रो स्टेशन के नीचे विश्वकर्मा रोड से सेक्टर-62 गोल चक्कर तक। वापसी में इसी रूट पर विश्वकर्मा रोड से बसें सेक्टर-75 के सामने से होकर बरौला तिराहे से बाएं मुड़कर भंगेल सूरजपुर कलेक्ट्रेट तक जाएंगी।
दूरी: करीब 30 किलोमीटर।
बसों की संख्या- 12
रूट नंबर-4
सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर-75, 76, 77 से सेक्टर-101 से दादरी-सूरजपुर-छलेरा रोड होते हुए सूरजुपर कलेक्ट्रेट तक
दूरी: करीब 30 किलोमीटर।
बसों की संख्या- 8 वैकल्पिक रूट के लिए छह बसें होंगी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


