दो अस्पतालों में हुआ 3 साल की बच्ची का इलाज, फिर तीसरे में दुर्लभ बीमारी का पता चला; अब HC पहुंचा पिता
खबर के अनुसार सितंबर 2022 में जन्मी इस बच्ची को शुरुआत में एम्स दिल्ली और सीएमसी वेल्लोर में गलत जांच और इलाज का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद जुलाई 2025 में मुंबई में हुई जांच से इस गंभीर बीमारी का सही पता चला।

एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझ रही साढ़े तीन साल की बच्ची के पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए बेटी की मदद के लिए अदालत से गुहार लगाई है। यह बच्ची 'LRBA प्रोटीन (लिपोपॉलीसेकेराइड-रिस्पॉन्सिव बेज-लाइक एंकर) की कमी' नाम की बीमारी से जूझ रही है, जो कि इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की क्षमता को धीरे-धीरे समाप्त कर देती है। याचिका में बताया गया है कि बच्ची के इलाज के लिए लगभग 40 लाख रुपए की जरूरत है और इस बारे में केन्द्र सरकार को बोन मैरो प्रत्यारोपण के लिए आर्थिक मदद जारी करने के लिए तुरंत निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में संविधान के तहत मिले 'जीवन के अधिकार' का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकार समय पर और किफायती इलाज की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
इस याचिका में बच्ची के पिता ने बताया है कि उनकी बेटी को जो बीमारी है वह 'दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय योजना 2021' के तहत योग्य है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों ने किसी भी तरह की कोई आर्थिक मदद जारी नहीं की है, जबकि डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इलाज में देरी से बच्ची की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
चेन्नई के अस्पताल में राशि सीधे भेजने की मांग
याचिका में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय को बच्ची के हैप्लोआइडेंटिकल बोन मैरो प्रत्यारोपण व ऑपरेशन के बाद की देखभाल के लिए जरूरी पूरी रकम को सीधे अपोलो हॉस्पिटल, चेन्नई में मंजूरी देने व इसे जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई है। बच्ची के उपचार के लिए इसी अस्पताल को सलाह दी गई है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि इलाज बिना किसी और देरी के शुरू हो।
जन्म के कुछ समय बाद ही बार-बार आने लगा बुखार
याचिका के मुताबिक बच्ची का जन्म सितंबर 2022 में हुआ था। जन्म के कुछ ही महीनों बाद उसे बार-बार बुखार आने लगा और हीमोग्लोबिन के स्तर में भी काफी गिरावट आने लगी। इस दौरान अप्रैल से अक्टूबर 2023 के बीच उसकी हालत लगातार बिगड़ने पर उसे कई बार खून व प्लेटलेट भी चढ़ाए गए।
दिल्ली एम्स और सीएमसी वेल्लोर में बताई गलत बीमारी
याचिका में कहा गया है कि बच्ची की शुरुआत में दिल्ली एम्स में जांच की गई थी, जहां डॉक्टर उसकी बीमारी का सही कारण पता नहीं लगा पाए। उन्होंने आगे की जांच की सलाह दी। बाद के टेस्ट में उसके शरीर में आर्सेनिक व सिल्वर का उच्च स्तर पाया गया, जिससे विषाक्तता का पता चला। हालांकि सीएमसी वेल्लोर में इलाज और आगे की जांच के बाद डॉक्टरों ने यह नतीजा निकाला कि पहले की गई बीमारी की पुष्टि की जांच गलत थी।
LRBA प्रोटीन की कमी नाम की बीमारी से जूझ रही मासूम
इसके बाद मुम्बई में जुलाई 2025 में हुई जांच के बाद सामने आया कि बच्ची LRBA प्रोटीन की कमी से जूझ रही है। यह एक दुर्लभ जेनेटिक विकार है, जो कि रोगों की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे समाप्त कर देती है। याचिका में कहा गया है कि जीवन के अधिकार में समय पर व सस्ते मेडिकल इलाज का अधिकार शामिल है। राज्य अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकता, जहां सरकारी चिकित्सा संस्थानों में जान बचाने वाला इलाज मौजूद नहीं है। इस याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है।
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