गाजियाबाद में लाखों की आबादी के लिए सिर्फ 33 सिटी बसें, इन रूटों पर ही मिल रही सुविधा

हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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गाजियाबाद शहर में सिर्फ 33 सरकारी सिटी बसें ही चल रही हैं। अगर आबादी के मुकाबले तुलना करें तो एक लाख लोगों पर एक बस भी नहीं चल रही है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

गाजियाबाद में लाखों की आबादी के लिए सिर्फ 33 सिटी बसें, इन रूटों पर ही मिल रही सुविधा

एनसीआर में आने वाले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की लाखों की आबादी के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम लगातार नाकाफी साबित हो रहा है। इतने बड़े शहर में सिर्फ 33 सरकारी सिटी बसें ही चल रही हैं। अगर आबादी के मुकाबले तुलना करें तो एक लाख लोगों पर एक बस भी नहीं चल रही है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्याप्त लोकल बस सेवा नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरी में डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। गाजियाबाद में पुराने शहर, वसुंधरा, वैशाली, इंदिरापुरम, मोदीनगर, लोनी और साहिबाबाद समेत कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग रोजाना नौकरी, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर सफर करते हैं। शहर के अंदर चलाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के पास केवल 50 ई-बस ही हैं। इनमें से 17 बसों का बैटरी पैक खराब हो चुका है। इस समय शहर के अंदर केवल पांच रूटों पर 33 बस ही सुविधा दे रही है। एक बार चार्ज होने के बाद ये बस करीब 120 किलो मीटर तक चल सकती है। इसके बाद इन्हें चार्ज करने के लिए ले जाना पड़ता है।

डग्गामार वाहनों से सफर को मजबूर लोग

बसों की संख्या बेहद कम होने के कारण यात्रियों को मजबूरी में लंबी दूरी के लिए भी ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा से सफर करना पड़ता है या डग्गामार वाहनों से जाना पड़ता है। इसमें न सिर्फ अतिरिक्त खर्च होता है, बल्कि सफर भी परेशानी और खतरे से भरा होता है।

कई रूटों पर बसें समय से नहीं पहुंचतीं, जबकि कई इलाकों में लोकल बस सेवा है ही नहीं। यात्रियों का कहना है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में बसों में इतनी भीड़ हो जाती है कि लोगों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है।

महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली छात्रों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इंदिरापुरम निवासी अमित कुमार ने बताया कि उन्हें रोजाना दफ्तर जाने के लिए दो से तीन बार वाहन बदलने पड़ते हैं। पर्याप्त बसें नहीं होने के कारण समय और किराया दोनों अधिक खर्च हो रहे हैं। वहीं वसुंधरा निवासी पूजा शर्मा का कहना है लोकल बस मजबूत नहीं होने के कारण रोजाना कई किलोमीटर तक का सफर पैदल तय करना पड़ता है।

इन रूटों पर ही मिल रही सुविधा

जिले में सीमित संख्या में सिटी बसों का संचालन कुछ चुनिंदा रूटों पर ही किया जा रहा है। इनमें लोनी से पुराना बस अड्डा रूट पर 12 बसें संचालित हैं। वहीं, पुराना बस अड्डा से मंडोला रूट पर केवल एक बस चल रही है। दिलशाद गार्डन से मसूरी रूट पर भी सिर्फ एक बस की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा कौशांबी से गोविंदपुरी रूट पर सात बसों का संचालन किया जा रहा है, जबकि कौशांबी से दादरी रूट पर 12 बसें चलाई जा रही हैं।

के.एन. चौधरी, प्रबंध निदेशक, यूपीएसआरटीसी, ''सिटी बसों की संख्या बढ़ाने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। खराब पड़ी 17 बसों की बैटरी को बदलवाने की प्रक्रिया भी चल रही है।''

रिपोर्ट - अफजल खान

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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