आयुष्मान भारत योजना के पैनल से हटाए जा सकते हैं गाजियाबाद के 30 प्राइवेट अस्पताल, ये है वजह

Feb 14, 2026 07:43 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पतालों पर अब स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। गाजियाबाद जिले के करीब 30 प्राइवेट अस्पताल तय 35 मानकों को पूरा न करने के कारण पैनल से बाहर हो सकते हैं।  

आयुष्मान भारत योजना के पैनल से हटाए जा सकते हैं गाजियाबाद के 30 प्राइवेट अस्पताल, ये है वजह

आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पतालों पर अब स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। गाजियाबाद जिले के करीब 30 प्राइवेट अस्पताल तय 35 मानकों को पूरा न करने के कारण पैनल से बाहर हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर 15 फरवरी तक सभी मानक पूर्ण करने का अंतिम अवसर दिया है।

गाजियाबाद जिले में वर्तमान में आठ सरकारी और 90 प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पैनल से जुड़े हैं। इन अस्पतालों में आकस्मिक स्थिति में मरीजों को भर्ती कर कैशलैस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। पैनल के अस्पतालों को शासन से तय मानकों को पूरा करने के लिए 15 फरवरी तक का समय दिया गया है। इनमें से 60 अस्पतालों ने तय मानक के हिसाब से अपने दस्तावेज अपलोड कर दिए हैं, लेकिन 30 निजी अस्पतालों ने अभी भी इंडिकेटर को पूरा नहीं किया है। इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है और मानक पूरा न करने पर पैनल से बाहर करने का अल्टीमेटम दिया गया है। नए इंडिकेटर लागू करने का मकसद इलाज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अस्पतालों का आधारभूत ढांचा और सेवाएं राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करना है।

एक लाख मरीजों को लाभ मिला

आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 8,94,734 लाभार्थी हैं। इनमें से 5,70,116 लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। इनमें 70 वर्ष से अधिक आयु के 31,417 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड भी शामिल हैं। वहीं, 99,474 लाभार्थी अब तक विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा चुके हैं। इनमें से 94,322 मरीजों के उपचार बिलों का भुगतान अस्पतालों को किया जा चुका है।

ये मानक तय किए गए

अस्पतालों में कम से कम 10 बेड (आईपीडी) होना जरूरी है। साथ ही 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहनी चाहिए। राज्य एम्पैनलमेंट एजेंसी से निर्धारित बेंचमार्क को पूरा करना जरूरी, केवल भवन और बेड की उपलब्धता पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। अस्पताल में योग्य चिकित्सक, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आवश्यक पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति भी अनिवार्य है। साथ ही पैथोलॉजी लैब, ब्लड बैंक और 24 घंटे संचालित फार्मेसी जैसी सुविधाएं भी होनी चाहिए। ब्लड बैंक की सुविधा होनी चाहिए।

डॉ. आरके गुप्ता, नोडल अधिकारी, आयुष्मान योजना, ''जिन अस्पतालों में कमियां मिली हैं, उन्हें 15 फरवरी तक का मौका दिया गया है। तय समय सीमा में मानक पूरे नहीं करने वाले अस्पतालों को पैनल से हटाया जाएगा।''

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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