नकली ट्रांसजेंडर बनकर रह रहे 3 बांग्लादेशी गिरफ्तार, एजेंटों की मदद से घुसे थे भारत में
दिल्ली पुलिस ने तीन अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। तीनों ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए ट्रांसजेंडर का भेष धारण कर रखे थे। इन्हें आजादपुर नई सब्जी मंडी के पास से गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली पुलिस ने तीन अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। तीनों ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए ट्रांसजेंडर का भेष धारण कर रखे थे। इन्हें आजादपुर नई सब्जी मंडी के पास से गिरफ्तार किया गया।
दिल्ली पुलिस ने तीन अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों पुलिस की पकड़ से बचने के लिए ट्रांसजेंडर का भेष धारण किए हुए थे। एक अधिकारी ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इन्हें आजादपुर नई सब्जी मंडी के पास से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने 8 मई को एक अभियान शुरू किया। तीनों बांग्लादेशी नागरिक नकली ट्रांसजेंडर के रूप में पाए गए। वे भीड़भाड़ में घुलने-मिलने और लोगों के संदेह से बचने के लिए ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगते थे।
इन बांग्लादेशियों के पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए गए। इनमें से एक में प्रतिबंधित एप्लीकेशन था, जिसका इस्तेमाल वे बांग्लादेश में अपने परिवारों से संपर्क करने के लिए करते थे।
आरोपियों की पहचान मोहम्मद मकसुदा (40), अब्दुल हकीम (33) और फईम पायल (21) के रूप में हुई है। ये सभी बांग्लादेश के ढाका, मैमनसिंह और नारायणगंज सहित विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं।
पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि वे एजेंटों की मदद से अवैध रूप से भारत की सीमा में घुसे थे और ट्रेन से दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने महिलाओं की तरह दिखने और लोगों को धोखा देने के लिए ट्रांसजेंडर का रूप धारण कर लिया।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


