दिल्ली में दिल दहलाने वाली घटना, भीड़ ने 25 साल के लड़के को पीट-पीटकर मार डाला
दिल्ली में दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है। चोरी की कोशिश करते पकड़े गए एक लड़के को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना के सिलसिले में दो नाबालिगों समेत 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी और लोग हिरासत में लिए जा सकते हैं।

दिल्ली में दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है। चोरी की कोशिश करते पकड़े गए एक लड़के को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना के सिलसिले में दो नाबालिगों समेत 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी और लोग हिरासत में लिए जा सकते हैं।
दो नाबालिगों समेत आठ लोग हिरासत में
पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार सुबह बाहरी दिल्ली के कंझावला इलाके में घटी। यहां एक घर में चोरी की कोशिश करते हुए पकड़े जाने के बाद 25 साल के एक लड़के को भीड़ ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने बताया कि इस घटना के सिलसिले में दो नाबालिगों समेत आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। मौके से बरामद वीडियो में दिख रहे अन्य आरोपियों की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं।
लाठियां और डंडे लिए हुए थे दो दर्जन से ज्यादा लोग
पुलिस को मारपीट के बारे में एक पीसीआर कॉल मिली थी। उसके बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां उन्होंने घायल लड़के को गंभीर हालत में पाया। उसे गहरी चोटें लगी थीं और खून बह रहा था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वहां लाठियां और डंडे लिए हुए दो दर्जन से ज्यादा लोग मौजूद थे। पुलिस ने बताया कि घायल लड़के को तुरंत पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौके से कई वीडियो बरामद
अधिकारियों ने बताया कि क्राइम और फोरेंसिक टीमों ने घटनास्थल का मुआयना किया और सबूत इकट्ठा किए। पुलिस ने मौके से कई मोबाइल फोन वीडियो भी बरामद किए, जिनके आधार पर आठ स्थानीय निवासियों को हिरासत में लिया गया और हमले में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई लाठियों को जब्त कर लिया गया।
घर से चोरी करने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला कि सुबह के समय स्थानीय लोगों ने उस लड़के को एक घर से चोरी करने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया था। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान वह लड़का कथित तौर पर आक्रामक हो गया और उसने पास पड़ी एक ईंट से एक व्यक्ति के सिर पर वार कर दिया।
बांधकर लाठियों, लातों और घूंसों से मारा
पुलिस ने बताया कि इसके बाद भीड़ ने कथित तौर पर उसे बांध दिया और लाठियों, लातों और घूंसों से उसे बुरी तरह पीटा, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच की जा रही है। अभी और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने की संभावना है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


