कनाडा से थाईलैंड तक फैला लॉरेंस बिश्नोई का जाल, जेल से चला रहा था पूरा नेटवर्क; कोर्ट ने तय किए आरोप
चार्जशीट के अनुसार जांच के दौरान पुलिस ने जब जेल में आरोपियों के बैरक की तलाशी ली तो वहां से पिस्तौल, असॉल्ट राइफलें, ग्रेनेड, डेटोनेटर और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस जैसे हथियार व अन्य आपत्तिजनक चीजें बरामद हुईं थीं।

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और उसके खिलाफ मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के अलावा अन्य कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए। इस फैसले के साथ ही बिश्नोई और उसके गैंग के खिलाफ पूर्ण ट्रायल यानी मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
अदालत ने यह कार्यवाही साल 2021 में दर्ज एक केस के सिलसिले में की, जिसमें उस पर कथित रूप से एक अपराध सिंडिकेट चलाने और जबरन वसूली व अपहरण रैकेट चलाने के आरोप लगे थे। इसके साथ ही पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रशांत शर्मा ने बिश्नोई पर हथियार अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी आरोप तय किए।
लॉरेंस बिश्नोई समेत इन लोगों पर हुए आरोप तय
पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई के अलावा इस गैंग के 19 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं। जिनमें संदीप उर्फ काला जठेड़ी, संपत नेहरा, राजकुमार उर्फ राजू बसोदी, वीरेंद्र प्रताप उर्फ काला राणा, नरेश उर्फ सेठी, अनिल उर्फ लीला, प्रियव्रत उर्फ काला/फौजी, सचिन उर्फ भांजा, अक्षय उर्फ पाल्डा और अन्य नाम शामिल हैं। इन सभी पर मकोका की धारा 3 और 4 के अलावा आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
यह है धारा 3 और धारा 4 लगने का मतलब
कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि मकोका अधिनियम की धारा 3 जहां संगठित अपराध के लिए सजा का प्रावधान करती है, वहीं धारा 4 संगठित अपराध सिंडिकेट के किसी सदस्य की ओर से बेहिसाब संपत्ति रखने पर सजा से संबंधित है। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस सिंडिकेट का एक विशाल आपराधिक नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उससे भी आगे तक फैला हुआ था।
जबरन वसूली समेत इन अपराधों में शामिल रहा गैंग
जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यह सिंडिकेट सुनियोजित तरीके से जबरन वसूली, सुपारी लेकर हत्याएं करने, हथियारों की अवैध तस्करी और आतंक फैलाकर धमकाने जैसी गतिविधियों में लिप्त था। ये लोग व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों को निशाना बनाकर उनसे प्रोटेक्शन मनी(सुरक्षा राशि) की मांग करते थे। चार्जशीट में यह भी बताया गया कि वसूली से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अत्याधुनिक हथियार खरीदने और गैंग के ऑपरेशंस को बनाए रखने के लिए किया जाता था।
जेल के अंदर से ही चला रहे थे पूरा नेटवर्क
चार्जशीट में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए यह भी बताया गया कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथी स्मगल करके अंदर लाए गए मोबाइल फोन के जरिए जेल के भीतर से ही सिंडिकेट (गिरोह) चला रहे थे। जांच में इस सिंडिकेट के तार कनाडा और थाईलैंड जैसे देशों से भी जुड़े पाए गए, जो इनके आपराधिक नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दिखाते हैं।
बैरक से कई हथियार भी बरामद हुए थे
चार्जशीट के अनुसार जांच के दौरान पुलिस ने जब जेल में आरोपियों के बैरक की तलाशी ली तो वहां से पिस्तौल, असॉल्ट राइफलें, ग्रेनेड, डेटोनेटर और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस जैसे हथियार व अन्य आपत्तिजनक चीजें बरामद हुईं थीं। इन बरामदगियों को पुलिस ने गैंग की क्षमता दिखाने वाले अहम सबूतों के तौर पर पेश किया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील अखंड प्रताप ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह स्पष्ट है कि कई राज्यों में सक्रिय एक संगठित अपराध सिंडिकेट मौजूद है, और इसलिए इस पर MCOCA के कड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: सौरभ जैन भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक हिस्सा हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट सेक्शन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग तीन सालों से यहां कार्यरत हैं। सौरभ का करियर टीवी मीडिया से शुरू होकर डिजिटल मीडिया की गतिशीलता तक फैला हुआ है, जो उन्हें खबरों को गहराई और सटीकता के साथ प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कार्य अनुभव
सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।
इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।
सौरभ जैन का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी सही तथ्यों व आसान भाषा में पाठकों तक खबरें पहुंचाना है। इस काम में तेजी जितनी जरूरी है, सटीकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिर चाहे वह आम जीवन की खबरें हों, राजनीति की खबरें हों, खेल की खबरें हों या फिर चकाचौंध से भरे बॉलीवुड की खबरें हों। कोई भी खबर सही तथ्यों के साथ रीडर्स तक पहुंचनी चाहिए। हड़बड़ी में तथ्यों की पुष्टि ना होने पर गलत जानकारी पाठकों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसलिए सौरभ का मानना है कि पत्रकारिता का मतलब केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना ही नहीं, बल्कि सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाते हुए उनकी बुद्धिमत्ता और विवेक को भी जागृत करना होता है।


