नोएडा में युवराज की मौत मामले में दो और गिरफ्तारियां, पुलिस ने प्लॉट से जुड़े दो अन्य बिल्डरों को दबोचा
मामले में आरोपी बनाए गए दोनों समूह ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए किसी भी तरह की गलती मानने से इनकार कर दिया। इस दौरान लोटस ग्रीन्स ने कहा कि साल 2019-20 में उसने नोएडा अथॉरिटी की मंज़ूरी से प्लॉट किसी दूसरी पार्टी को ट्रांसफर कर दिया था।

नोएडा के सेक्टर 150 में स्थित जिस प्लॉट के गड्ढे में भरे पानी में डूबकर 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हुई थी, उस प्लॉट के दो और शेयरहोल्डर्स को गुरुवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों की पहचान हरियाणा के फरीदाबाद के सेक्टर 21D में रहने वाले रवि बंसल और गाजियाबाद के शालीमार गार्डन में रहने वाले सचिन करणवाल के रूप में हुई है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजीव नारायण ने कहा, 'बंसल और करणवाल लोटस ग्रीन्स प्राइवेट लिमिटेड में पदाधिकारी हैं, और उनके पास प्लॉट में शेयर भी हैं।'
इस बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए ग्रेटर नोएडा के डीसीपी ने बताया, 'थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र अंतर्गत एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवक के साथ हुई घटना के संबंध में वादी द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर तत्काल सुसगंत धाराओं में FIR दर्ज की गई थी। इसी क्रम में लोटस ग्रीन कंपनी के 2 और बिल्डर की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है, अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है।'
यह हादसा बीते शुक्रवार की देर रात को तब हुआ था, जब पानी से भरे इस गड्ढे में युवराज की कार गिरने से उसकी मौत हो गई थी। हालांकि मौत से पहले उसने करीब डेढ़ घंटे तक मदद का इंतजार भी किया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले में नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए चार टीमें बनाई गई हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी और भी कई गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है।
गुरुवार को पुलिस ने इस मामले में पर्यावरण (प्रोटेक्शन) एक्ट, वॉटर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट और BNS की धाराओं, जिसमें 290 (इमारतों या स्ट्रक्चर के संबंध में लापरवाही भरा व्यवहार) भी शामिल है, के तहत MZ विज़टाउन के प्रमोटर अभय कुमार समेत प्लॉट के पांच शेयरहोल्डर्स के खिलाफ एक और FIR दर्ज की।
वहीं इससे पहले सोमवार को पुलिस ने MZ विज़टाउन और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत और जान को खतरे में डालने का मामला दर्ज किया था। इसके एक दिन बाद यानी मंगलवार को विज़टाउन के प्रमोटर को गिरफ्तार किया गया था। जिसके अगले दिन बुधवार को एक स्थानीय अदालत ने उसे छह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
हालांकि मामले में आरोपी बनाए गए दोनों समूह ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए किसी भी तरह की गलती मानने से इनकार कर दिया। इस दौरान लोटस ग्रीन्स ने कहा कि साल 2019-20 में उसने नोएडा अथॉरिटी की मंज़ूरी से प्लॉट किसी दूसरी पार्टी को ट्रांसफर कर दिया था। वहीं MZ विज़टाउन प्लानर्स के प्रमोटर ने कहा कि उन्हें यह ज़मीन इसी तरह खुदी हुई हालत में मिली थी और उन्हें अबतक वहां प्रोजेक्ट शुरू करने की इजाजत नहीं दी गई है।
यह हादसा उस वक्त हुआ था, जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम में अपने ऑफिस से घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे में एक 90-डिग्री के मोड़ पर उनकी गाड़ी पर से उनका नियंत्रण हट गया और वह बाउंड्री वॉल तोड़कर पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी।
चश्मदीदों ने बताया कि हादसे के बाद मेहता किसी तरह गाड़ी के सनरूफ से बाहर निकलकर अपनी आधी डूबी हुई कार की छत पर चढ़ गए और मदद के लिए अपने पिता को फोन किया। तब तक वहां पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स की टीमें भी पहुंच गईं, लेकिन उन्हें बचा नहीं पाईं। करीब 90 मिनट तक मेहता फंसे रहे और मदद के लिए पुकारते रहे, जबकि उनकी गाड़ी धीरे-धीरे डूबती गई। जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

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